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Pyloromyotomy : पाइलोरोमायोटमी क्या है?

परिचय|जोखिम|प्रक्रिया|रिकवरी
Pyloromyotomy : पाइलोरोमायोटमी क्या है?

परिचय

पाइलोरोमायोटमी क्या है?

पाइलोरोमायोटमी बच्चों के पेट से संबंधित सर्जरी है। पेट और छोटी आंत के बीच में एक वॉल्व होता है। जिसकी मोटाई बढ़ जाती है और खाना पेट से छोटी आंत में नहीं जा पाता है। इस स्थिति को पाइलोरिक स्टेनॉसिस कहते हैं। ये बच्चे में पाचन प्रक्रिया को बाधित करता है। जिसके चलते उल्टियां होना, डिहाइड्रेशन, वजन का कम होना आदि समस्याएं होती हैं। पाइलोरिक स्टेनॉसिस से पीड़ित बच्चे को हमेशा भूख लगी रहती है। पाइलोरिक स्टेनॉसिस को सर्जरी से ठीक किया जाता है। ज्यादातर सर्जरी अभी तक सफल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, यह समस्या लड़कियों की तुलना में लड़कों में ज्यादातर देखी गई है। इस समस्या के पीछे क्या कारण है वो अज्ञात है। लेकिन इसके पीछे का कारण बच्चे के जीन हो सकते हैं। जिन बच्चों के पेरेंट्स को को पाइलोरिक स्टेनोसिस था, उनमें इस स्थिति की संभावना अधिक होती है।

और पढ़ें : Whipple Procedure: विप्पल प्रोसीजर क्या है?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी की जरूरत कब होती है?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी जरूरत तब पड़ती है जब पाइलोरिक स्टेनॉसिस हो जाता है। क्योंकि बच्चा सही से कुछ खा नहीं पाता है, जिस वजह से वह कमजोर होता जाता है। सर्जरी ही पाइलोरिक स्टेनॉसिस का सबसे सटीक इलाज है। गैस्ट्रिक अल्सर का गंभीर परिणाम होने पर समस्या होती है और तब इस सर्जरी को किया जाता है। अगर बच्चे के डॉक्टर को लगता है कि बच्चे को ऐसी कोई समस्या है, तो वो बच्चे की जांच करेंगे और हिस्ट्री के बारे में जानेंगे और फिर बच्चे का अल्ट्रासाउंड कराएंगे। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट के आधार पर ही इस सर्जरी को करने का फैसला किया जाता है।

और पढ़ें : Tonsillectomy : टॉन्सिलेक्टमी क्या है?

जोखिम

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी करवाने से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी डॉक्टर उसी दिन कराने के लिए कहते हैं, जिस दिन पाइलोरिक स्टेनॉसिस के बारे में पता चलता है। ऐसे में अगर बच्चे को डिहाइड्रेशन हो गया है तो उसे ड्रिप लगाई जाती है। इसके बाद सर्जरी की जाती है।

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी में ज्यादा साइड इफेक्ट्स नहीं हैं। जो भी है वह भी बहुत रेयर है। सर्जरी के बाद बच्चे को उल्टियां हो सकती हैं या फिर पेट में दर्द होता है। अमूमन ये समस्याएं सभी को नहीं होती है। लेकिन, फिर भी आपको इसके साइड इफेक्ट्स और होने वाली समस्याओं के बारे में जान लेना चाहिए। साथ ही इस से संबंधित कोई सवाल हो तो सर्जन से जरूर शेयर करें। सर्जन सही जांच करके सही मेडिकेशन देंगे।

और पढ़ें : Percutaneous Nephrolithotomy : परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथॉटमी क्या है?

प्रक्रिया

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के लिए मुझे खुद को कैसे तैयार करना चाहिए?

आपको बच्चे की सर्जरी कराने से पहले इसकी पूरी तैयारी करनी होती है। सर्जरी से पहले वो सभी काम कर ले, जो आगे चलकर आपके काम आएंगे। पूरी तैयारी के साथ बच्चे की सर्जरी कराएंगे तो ये सफर आसान हो जाएगा। नीचे जानिए कि आपको इस सर्जरी से पहले क्या तैयारी करनी होगी :

  • आपको सर्जरी कराने से पहले आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • डॉक्टर से मिल कर बच्चे द्वारा ली जा रही दवाओं, सप्लिमेंट, विटामिन, एलर्जी और हेल्थ कंडिशन के बारे में बात करनी चाहिए।
  • इसके अलावा आप एनेस्थेटिस्ट से भी मिलें और सर्जरी के दौरान बेहोश या सुन्न करने की प्रक्रिया प्लान करें।
  • डॉक्टर से पूछ लें कि सर्जरी से कितने घंटे पहले से खाना पीना बंद करना है। परिवार के लोगों को भी आप डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के बारे में बता दें। ज्यादातर मामलों में सर्जरी कराने से छह घंटे पहले से कुछ भी नहीं खाना होता है।

और पढ़ें : Carpal Tunnel Syndrome Surgery : कार्पल टनल सिंड्रोम सर्जरी क्या है?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी में होने वाली प्रक्रिया क्या है?

हर सर्जरी को करने में अलग-अलग समय लग सकता है। कुछ सर्जरी लंबे समय तक चलती हैं, तो कुछ कम समय के लिए चलती हैं। पाइलोरोमायोटमी सर्जरी करने में लगभग एक घंटा लगता है। इसके लिए डॉक्टर बच्चे को पहले ड्रिप लगाएंगे। इसके बाद सर्जन पेट के ऊपरी हिस्से पर एक चीरा लगाते हैं। इसके बाद पाईलोरिक मांसपेशी को फैलाते हैं। जिससे पेट और छोटी आंत के बीच का भाग खुल जाता है। फिर सर्जन चीरे के स्थान पर टांका लगाते हैं।

और पढ़ें : Eyelid Surgery : आइलिड सर्जरी या ब्लेफेरोप्लास्टी क्या है?

पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद क्या होता है?

  • सर्जन से पूछ लें कि पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद बच्चे को कब से खाना खिलाना शुरू कर सकते हैं।
  • आप सर्जरी के तीन या चार दिन बाद बच्चे को घर वापस ले जा सकते हैं।
  • ज्यादातर बच्चे पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद जल्दी रिकवर करते हैं। सामान्य तौर से खाने लगते हैं और उनका वजन भी ठीक होने लगता है।
  • पाइलोरिक स्टेनॉसिस बच्चे को दोबारा प्रभावित कर सकता है।
  • इन सभी बातों के अलावा अगर बच्चे को किसी भी तरह की समस्या आती है तो सर्जन और डॉक्टर से जरूर मिलें और परामर्श लें।

और पढ़ें : Endoscopic Sinus Surgery: एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी क्या है?

रिकवरी

इसके बाद बच्चे का ख्याल कैसे रखना चाहिए?

सर्जरी चाहे कोई भी हो, किसी की भी हो, इसके बाद सही देखभाल करने की जरूरत होती है। सर्जरी के बाद अगर जरा भी लापरवाही बरती जाएगी और बच्चे की सही देखभाल नहीं की जाएगी, तो बच्चे के शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे की पूरी देखभाल की जाए और लापरवाही न बरती जाए।

  • पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बाद ब्लीडिंग या संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं बच्चे को नियमित रूप से खिलाते रहें।
  • सर्जरी के बाद बच्चा एक हफ्ते में सामान्य दिनचर्या को फॉलो कर सकता है।

उम्मीद है आपको पाइलोरोमायोटमी सर्जरी के बारे में अपने मन के जरूरी सवालों के जवाब मिल गए होंगे। अगर आपके या आपके किसी परिचित के बच्चे की ये सर्जरी होने वाली है, तो इस आर्टिकल में दी गई जानकारियां आपके काम आएंगी। इस लेख में हमने आपको पाइलोरोमायोटमी सर्जरी की प्रक्रिया से लेकर इसके बाद बच्चे की देखभाल तक के बारे में जानकारी देने की कोशिश की है। इसके साथ ही ये भी बताया है कि आखिर इस सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है। आशा करते हैं कि आपको हैलो हेल्थ का ये लेख आपके काम आएगा। आपको हमारा ये आर्टिकल कैसा लगा, हमें हमारे फेसबुक पेज पर कमेंट कर के जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपके इस विषय से जुड़े अन्य कोई सवाल हैं, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर बच्चे को किसी भी तरह की समस्या हो तो सर्जन से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 04/06/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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