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बेबी की देखभाल करना है आसान, अगर आपको इस बारे में हो पूरी जानकारी

बेबी की देखभाल करना है आसान, अगर आपको इस बारे में हो पूरी जानकारी

एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि “भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां को बनाया”। साधारण शब्दों में कहा जाए तो मां जितना प्यार और देखभाल अपने बच्चे की करती है, उतना कोई और नहीं कर सकता। मां और बेबी (Mother and Baby) के बीच की बॉन्डिंग गर्भ से ही होना शुरू हो जाती है। लेकिन, एक औरत के मन में मां बनने की जितनी खुशी और उत्साह होता है, उतना ही एक डर भी होता है। हर मां चाहती है कि उसका बेबी (Baby) हमेशा खुश और स्वस्थ रहे। इसके लिए वो हर संभव प्रयास भी करती है। लेकिन, कई बार बच्चे की सुरक्षा को लेकर परेशान होना भी स्वभाविक है। खासतौर पर अगर आप पहली बार मां बनी हैं। जानिए, जन्म के बाद आप अपने शिशु की देखभाल (Baby Care) कैसे कर सकती हैं।

बेबी (Baby) के जन्म के बाद पहले साल किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पहला साल मां और बेबी (Mother and Baby) दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। जन्म के बाद से ही शिशु की देखभाल (Baby Care) की पूरी जिम्मेदारी मां पर होती है। ऐसे में मां को इन चीज़ों का पूरा ख्याल रखना पड़ता है, जैसे:

यह भी पढ़ें : शिशु को दूध पिलाने के नियम क्या हैं?

यह लिस्ट बहुत लंबी है। लेकिन, अपने शिशु की देखभाल (Baby Care) करना और उसे हर पल बढ़ते हुए देखने से बड़ा सुख एक मां के लिए कोई और हो ही नहीं सकता। शिशु की देखभाल (Baby Care) के साथ ही जानिए पहले साल बच्चे में कौन क्या-क्या ग्रोथ और डेवलपमेंटस होते हैं?

शिशु की देखभाल

एक साल तक बेबी (Baby) में क्या-क्या ग्रोथ और डेवलपमेंटस होते हैं?

पहले एक साल में बेबी (Baby) क्रॉल करना, कुछ शब्द बोलना, समझना और चलने की कोशिश करना शुरू कर देता है। जानिए क्या ग्रोथ होती हैं बेबी (Baby) में पहले साल:

1 से 3 महीना

  • बेबी (Baby) की पहली डेवलपमेंट स्टेज में वह स्माइल करना सीखता है।
  • अपने सिर और छाती को उठाने की कोशिश करेगा।
  • अपनी हथेलियों को बंद और खोलना सीखेगा। अपने हाथों को मुंह तक ले जाएगा।
  • चीजों को हाथों में पकड़ने की कोशिश करेगा।

4 से 6 महीना

  • इन महीनों में बेबी (Baby) अपने हाथों का प्रयोग करना सीख जाएगा।
  • अपनी स्थिति बदलना सीखेगा जैसे पेट या पीठ के बल रोल करना।
  • बच्चा आवाज निकालना और हंसना शुरू कर देता है।
  • चीजों को पकड़ेगा और खेलने की कोशिश करेगा
  • सपोर्ट के साथ बैठना और सिर को स्थिर रखना सीखेगा।

7 से 9 महीना

  • इस समय बच्चा क्रॉल करना शुरू कर देता है। कई बच्चे पेट के बल सरकना शुरू करते हैं
  • बिना सपोर्ट के बैठना सिख जाएगा।
  • इस उम्र के बच्चे अपना नाम सुन कर जवाब देते हैं।
  • कुछ बेबी (baby) “मां” और “पापा” बोलना भी शुरू कर देते हैं।
  • तालियां बजाना और खड़े होने के लिए खुद को पुल्ल करने की कोशिश करेगा।

10 to 12 महीना

  • एक साल के होने तक बेबी (Baby) खुद खाना खाने की कोशिश करता है।
  • किसी चीज का सहारा लेते हुए पूरे घर में घूमता है।
  • मां और पापा जैसे शब्दों को बोलना।
  • किसी चीज के लिए उंगली से इशारा करता है।

इस दौरान भी बेबी की देखभाल (Baby Care) जरूरी है। हर बच्चे की ग्रोथ अलग होती है। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे के विकास या ग्रोथ में कोई समस्या है तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कब कराना है जरूरी (When Breastfeeding is Important)

ब्रेस्टफीडिंग बच्चे को फीड कराने का प्राकृतिक तरीका है। इससे बेबी (Baby) को सभी नुट्रिशन्स मिलते हैं। शिशु की देखभाल (Baby Care) के लिए आपको इन सब चीजों के बारे में जानना जरूरी है।

  • मां के पहले दूध को कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहते हैं जो बेबी (Baby) के विकास के लिए जरूरी है।
  • मां का दूध बच्चे को कई बीमारियों जैसे एलर्जी (Allergy), मोटापा (Obesity), मधुमेह (Diabetes) और इंफेक्शंस (Infections) से बचाता है।
  • यह आसानी से पच जाता है इससे कब्ज, पेट दर्द नहीं होती और वजन भी सही रहता है।
  • दिमाग के लिए यह बहुत लाभदायक है।

यह भी पढ़ें : शिशुओं में गैस की परेशानी का घरेलू उपचार

ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए बेबी को कैसे पकड़ें (How to Hold Baby While Breastfeeding)

ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए बच्चे को कैसे पकड़ना है। शिशु की देखभाल (Baby Care) करते हुए यह जानकारी आपको होनी चाहिए। ब्रेस्टफीडिंग कराने के लिए सबसे पहले अपने बच्चे को इस तरह से अपनी गोद में लेटाएं कि उसका मुंह आपकी ब्रेस्ट के पास हो। अपने एक हाथ को बच्चे के सिर के नीचे रखें। अब निप्पल को पकड़ पर शिशु (Baby) के मुंह के पास पाएं और बच्चे को दूध पीने दें। इसके लिए विभिन्न ब्रेस्टफीडिंग पोसिशन्स जैसे क्रैडल होल्ड (Cradle Hold), क्रॉसओवर होल्ड (Crossover Hold), साइड-लाइंग पोजीशन (Side-Lying Position) को आप अपना सकती हैं। नवजात शिशु को हर दो से तीन घंटे में फीड कराना जरूरी है।यानी चौबीस घाटे में बारह बार। 4 से 6 महीने का बेबी (Baby)आमतौर पर चार से छे घंटे बाद दूध पीता है हालांकि दूध की मात्रा बढ़ जाती है।

ब्रेस्टफीडिंग

डिलिवरी या स्तनपान के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें-

कितने महीने तक ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए और कब बंद करनी चाहिए

शिशु की देखभाल (Baby Care) करते हुए ब्रेस्टफीडिंग आपको कब तक करानी है, यह बात पूरी तरह से आप पर निर्भर करती है। अधिक समय स्तनपान कराना आप दोनों के लिए अच्छा है। एक्सपर्ट ऐसा मानते हैं की कम से कम 6 महीने से लेकर 2 साल तक स्तनपान कराया जा सकता है।

बच्चे को सही पोषण कैसे मिले, कैसे रखें इसका ध्यान

स्तनपान छोड़ने बाद शिशु की देखभाल (Baby Care) और भी जरूरी हो जाती है। क्योंकि, इस दौरान उसे पूरे न्यूट्रिएंट्स नहीं मिल रहे होते। ऐसे में जरूरी है कि आप उसके खाने-पीने का खास ध्यान रखें। छे महीने के होने के बाद आप उसके आहर में इन चीजों को शामिल करें।

  • अच्छे से पकी सब्जियां (मैश कर के)
  • दलिया या पतली खिचड़ी
  • दाल का सूप या पतली डाल
  • मैश किया हुआ केला या उबले हुए अन्य फल

इन चीजों को बेबी (baby) को खाने को न दें

बच्चे के लिए तीन हेल्दी रेसिपीज

शिशु की देखभाल (Baby Care) में उसका आहार भी मुख्य है। जानिए, उन हेल्दी रेसिपीस के बारे में जो आप अपने बेबी (Baby) को दे सकते हैं।

1) रागी दलिया (Raagi Daliya)

यह फाइबर (Fiber) से भरपूर होता है और बोन डेंसिटी और मांसपेशियों के लिए अच्छा है।

सामग्री

  • रागी 3-4 चम्मच
  • पानी -एक कप
  • गुड़ -स्वादानुसार

कैसे बनाएं

  • रागी को पूरा रात भिगो कर रखें।
  • अब इसमें थोड़ा पानी डालकर इसे पीस लें और उबाल लें।
  • जब यह रागी थोड़ी गाढ़ी हो जाए, तो उसमे दूध और गुड़ मिला लें।

शिशु की देखभाल

2) दाल करी (Daal Cury)

दाल से आपके बच्चे को कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और प्रोटीन (Protin) मिलेंगे

सामग्री

  • मुंग दाल – आधा कप
  • हल्दी – आधा चम्मच
  • घी -1 चम्मच
  • जीरा और नमक- स्वादानुसार
  • पानी – एक कप

कैसे बनाएं

  • दाल को धो कर उसमे नमक और हल्दी डाल दें।
  • अब कुकर में पानी डाल कर इस दाल को उबाल लें।
  • एक अन्य बरतने में घी डालें। इसमें जीरा डालने के बाद उबली हुई डाल उसमे डाल कर कुछ देर पका लें।

3) टमाटर और गाजर का सूप (Tomato and Carrots Soup)

टमाटर और गाजर का सूप से बच्चे को विटामिन (Vitamin) अच्छी मात्रा में मिलेगा।

सामग्री

  • गाजर और टमाटर -1
  • प्याज और लहसुन कटा हुआ- आधी कटोरी
  • घी- एक चम्मच
  • जीरा और नमक- स्वादानुसार
  • पानी- एक कटोरी

कैसे बनाएं

  • सब्जियों को धो कर छोटे टुकड़ों में काटे। टमाटर की स्किन भी निकाल दें।
  • एक कुकर में घी गर्म करें और उसमे जीरा डाल दें।
  • अब इसमें प्याज और लहसुन डाल कर फिर से उसे पकाएं।
  • अब गाजर और टमाटर भी डाल दें। अंत में नमक डालें।
  • इसे पका लें और उसके बाद छान लें। आपका सूप तैयार है।

यह भी पढ़ें : गर्भावस्था में चेचक शिशु के लिए जानलेवा न हो जाएं

शिशु की देखभाल (Baby Care) करने के तरीके कौन से हैं?

मालिश (Massage)

शिशु की देखभाल (Baby Care) में मालिश का भी महत्वपूर्ण स्थान है। मालिश करने से न केवल मां और बेबी (Mother and Baby) के बीच का रिश्ता मजबूत होता है बल्कि उसको स्वस्थ्य संबंधी भी कई लाभ होते हैं, जैसे:

मालिश कैसे करें

  • किसी आरामदायक जगह पर बेड पर या नीचे किसी कारपेट पर बैठ जाएं।
  • बेबी (Baby) को अपने सामने एक तौलिये के ऊपर लेटा दें।
  • अब बेबी (Baby) को मालिश के लिए तैयार करें। उससे बातें करें, उसे कोई कविता या गाना सुनाएं।
  • तेल को अपने हाथों में लें और बेबी (Baby) के सिर पर डाल दें।
  • आराम से उसकी मालिश करते हुए इस तेल को पूरे सिर पर फिला दें।
  • बेबी के सिर के कोमल हिस्से पर अधिक दबाव न बनाएं।
  • ऐसे ही अपने बच्चे के सिर, चेहरे, पीठ, छाती, पेट, पैरों और टांगों की मालिश करें।

नहलाना (Bathing)

यह अपने बेबी (Baby) के साथ समय बिताने के लिए यह सबसे अच्छा तरीका है। बच्चे को नहलाते हुए बहुत ध्यान रखना पड़ता है, जैसे:

  • बच्चे को नहलाने वाले पानी और जगह का तापमान एकदम सही होना चाहिए।
  • बच्चे को बहुत आराम से पकड़ें क्योंकि इस दौरान बच्चे का शरीर फिसलन भरा हो जाता है।
  • बेबी (Baby) की सभी जरूरी चीजें एक ही स्थान पर होनी चाहिए।

कैसे नहलाएं

  • बेबी (Baby) को नहलाने से पहले अपने हाथ अच्छे से धोएं और बच्चे के टब को पानी से भर दें।
  • बच्चे के कपडे उतारे और एक कुशन या मोटे तौलिये को अपनी आसपास के तल पर रख कर बच्चे को उस पर लेटा दें।
  • आराम से बच्चे की आंखों, चेहरे, कान आदि को साफ करें।
  • अब बच्चे को अच्छे से पकड़ कर उसके सिर को पानी से गीला करें।
  • शैंपू अपने हाथों पर डालें और बच्चे के सिर पर सर्कुलर मोशन में लगा दें।
  • ऐसे ही बच्चे के पूरे शरीर को साबुन लगा कर साफ कर दें और बाद में बच्चे को अच्छे से सूखा कर उसे कपडे पहना दें।

बच्चे की सुरक्षा

डायपर रैश (Diaper Rash)

डायपर रैश त्वचा के सूज जाने का एक सामान्य रूप है। जो बच्चे के बॉटम पर चमकदार लाल त्वचा के पैचवर्क के रूप में दिखाई देता है। डायपर रैश की समस्या अक्सर गीले डायपर, किसी चीज से इंफेक्शन या त्वचा की संवेदनशीलता से संबंधित होती है। अगर शिशु को डायपर रैश हों तो ऐसे करें शिशु की देखभाल (Baby Care)।

  • बच्चे का डायपर को बार- बार बदलें
  • जब भी डायपर बदलें, बेबी (Baby) के बॉटम को गर्म पानी से साफ करें।
  • अल्कोहल या खुशबु वाले वाइप्स का प्रयोग न करें।
  • बच्चे की त्वचा को गीला न रखें।
  • अधिक टाइट डायपर न पहनाएं।
  • जितना अधिक समय हो बच्चे को बिना डायपर के ही रहने दें।
  • दवाई लगाएं

बच्चे को सुलाना (Sleeping)

छोटे बच्चे एक दिन में कम से कम दस से अठारह घंटे सोते हैं। सोना बच्चे के स्वास्थ्य और ग्रोथ (Baby Health and Growth) के लिए बहुत जरूरी है। जानिए बच्चे को सुलाते हुए कैसे करें शिशु की देखभाल (Baby Care)।

  • अपने बच्चे के सोने के संकेतों को समझें।
  • बच्चे के सोने की दिनचर्या बनाएं, ताकि वो रोज एक ही समय पर सोये।
  • सोते हुए उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
  • जिस जगह या कमरे में उसे सुला रहे हैं वो बिलकुल शांत और अंधेरा हो और वहां का तामपान भी सही हो।

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अगर बेबी प्रीमैच्योर (Premature Baby) है तो उस शिशु की देखभाल (Baby Care) कैसे करें?

प्रीमैच्योर शिशु (Premature Baby) को खास देखभाल की जरूरत होती है, जानिए इस बारे में:

स्पेशल डायट

  • अगर आपका बेबी प्रीमैच्योर है, तब भी ब्रेस्ट मिल्क उसके लिए सबसे अच्छा आहार है। यदि आपका बच्चा अभी तक दूध पीने के लिए तैयार नहीं है तो आपके बेबी (Baby) को एक ट्यूब के माध्यम से फीड कराया जा सकता है।
  • अभी आपका बच्चा ठीक नहीं है और बहुत छोटा है, तो आपको एकदम उसे ब्रेस्टमिल्क (Breastfeed) देने की सलाह नहीं दी जाएगी। ऐसे में एक्सप्रेसिंग मिल्क दिया जाता है।
  • हालांकि, प्रीमैच्योर शिशुओं (Premature baby) के लिए भी ब्रेस्ट मिल्क सबसे अच्छा है। लेकिन, उन्हें ग्रोथ के लिए विटामिन और मिनरल की भी जरूरत पड़ती है।ऐसे में प्रीमैच्योर शिशुओं (Premature Baby) को सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।
  • यही नहीं, प्रीमैच्योर शिशुओं (Premature Baby) के लिए खासतौर पर फार्मूला दूध भी बनाया गया है ताकि, उन्हें सभी पोषक तत्व मिलें।

स्पेशल केयर

प्रीमैच्योर शिशुओं (Premature Baby) को अगर इंफेक्शन हो, तो उनका ट्रीटमेंट एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। अगर उन्हें सांस लेने में समस्या हो तो उन्हें वेंटीलेटर (Ventilator) या एक्स्ट्रा ऑक्सीजन से सपोर्ट दी जाती है। इन बच्चों को निओनेटल इंटेंसिव केयर (Neonatal intensive care) में रखा जाता है।

शिशु की देखभाल

घर पर एक प्रीमैच्योर शिशु (Premature Baby) की देखभाल (Baby Care) कैसे करें:

  • जिस जगह पर बेबी (Baby) हो, उस जगह का तापमान सही होना चाहिए
  • नहलाते हुए खास सुरक्षा का ख्याल रखें।
  • लोगों को अपने घर आने या बच्चे को कहीं ले जाने से बचे।
  • कंगारू केयर (Kangaroo Care) के साथ ब्रेस्टफीडिंग कराएं।
  • किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहें, कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।

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बेबी (Baby) के जन्म के बाद मां की जिम्मेदारियां कम नहीं होती बल्कि बढ़ जाती हैं। लेकिन, अपने शिशु की देखभाल (Baby Care) करना मां के लिए एक सुन्दर सपने की तरह होता है। ऐसे में, कुछ चीजों का ध्यान रख कर आप इन खूबसूरत पलों को हमेशा अपनी यादों में समेट का रख सकती हैं। बेबी (Baby) से जुडी कोई भी परेशानी या चिंता होने पर डॉक्टर या किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
AnuSharma द्वारा लिखित
अपडेटेड 18/02/2021
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