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सेक्स के बाद ब्लीडिंग, जाने किन कारणों से होती है?

इंटरकोर्स के बाद होने वाली ब्लीडिंग को जेनाइटल ब्लीडिंग भी कहा जाता है। मेडिकल क्षेत्र में वजाइना से होने वाली ब्लीडिंग को बताने के लिए जेनाइटल ब्लीडिंग जैसे शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। सेक्स के बाद ब्लीडिंग कई कारणों से हो सकती है। शोध के अनुसार वयस्क महिलाओं में करीब 0.7 से 9 फीसदी केस ऐसे होते हैं जिनमें इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या देखने को मिलती है, खासतौर से सर्विक्स से ब्लीडिंग होती है। वहीं वैसी महिलाएं जिनको मासिक धर्म नहीं होता है, उनमें ब्लीडिंग के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। तो आइए इस आर्टिकल में हम सेक्स के बाद ब्लीडिंग के कारणों व उसके निदान पर बात करेंगे। वहीं जानेंगे कि यह क्यों होता है।

सेक्स के बाद ब्लीडिंग, जाने किन कारणों से होती है?

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जानें क्यों होता है सेक्स के बाद ब्लीडिंग

  • सेक्स के बाद ब्लीडिंग अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग कारणों से हो सकता है, वैसी महिलाएं जिनको पीरियड्स (बुजुर्गों में) नहीं होते उनको और वैसी महिलाएं जिनको पीरियड्स होते हैं उनको अन्य कारणों से ब्लीडिंग होती है
  • यदि सेक्स के बाद वजाइनल ब्लीडिंग का पीरियड्स से संबंध नहीं है तो यह पोस्टकोइटल ब्लीडिंग (postcoital bleeding) की श्रेणी में आएंगे।
  • कोई भी व्यक्ति सेक्सुअल इंटरकोर्स से गुजरे तो उसे पोस्टकोइटल ब्लीडिंग हो सकता है

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क्यों होती है यह समस्या, जानना है जरूरी

सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने के कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में हमें एक्सपर्ट व डॉक्टरी सलाह तक लेनी पड़ सकती है।

वजायनल ड्रायनेस है बड़ी वजह

सेक्स के बाद ब्लीडिंग वजायनल ड्रायनेस के कारण भी यह समस्या होती है। यह पोस्टकोइटल ब्लीडिंग का सबसे बड़ा कारण है। प्राइवेट पार्ट की स्किन के ड्राई होने की वजह से डैमेज होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है। इसके कारण वजाइना के अंदर टिशू को प्रोड्यूस करने वाले म्यूकस के चोटिल होने की संभावनाएं अधिक होती हैं।

इन कारणों से हो सकती है वजाइनल ड्रायनेस की समस्या 

  • बिना कामोत्तेजना के इंटरकोर्स करना : इंटरकोर्स के पहले कामोत्तेजना के कारण वजाइनल टिशू नेचुरल लूब्रिकेंट्स निकालते हैं, इस कारण वजाइनल टिशू में ड्रायनेस की समस्या दूर होती है और इंटरकोर्स के दौरान फ्रिक्शन होने की वजह से डैमेज नहीं होता है।
  • जेनिटोयूरिनरी –जेनिटोयूरिनरी सिंड्रोम ऑफ मेनोपॉज (Genitourinary syndrome of menopause) जीएसएम : इसे वजाइनल एट्रोफी भी कहा जाता है। जीएसएम के कारण वजाइनल टिशू के लूब्रिकेशन, थिकनेस और इलास्टिसिटी में कमी आती है।
  • ओवरी डैमेज और रिमूवल के कारण : कुछ एक्सीडेंट की वजह से ओवरी डैमेज हो सकते है। कई मामलों में ओवरी को निकालने के कारण शरीर में एस्ट्रोजन निकालने से सबसे बड़ा नुकसान पहुंचता है।
  • धोने के कारण : कई बार बार-बार धोने के कारण वजाइनल टिशू इरीटेट होने के साथ ड्राई हो जाते हैं।
  • शिशु के जन्म या ब्रेस्ट फिडिंग के कारण : प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन लेवल काफी ज्यादा रहता हैं। वहीं शिशु के जन्म के तत्काल बाद यह लेवल एकाएक गिर जाता है। ऐसा शिशु के जन्म के तुरंत बाद होता है। क्योंकि इसके बाद एस्ट्रोजन हार्मोन ब्रेस्ट मिल्क को बनाने का काम करते हैं।
  • ऐसी दवा जो एस्ट्रोजन को प्रभावित करने के साथ शरीर को डिहाइड्रेट करती है : एंटी एस्ट्रोजन दवा का सेवन करने के कारण वजाइनल ड्रायनेस की समस्या हो सकती है। इसमें कोल्ड-फ्लू की दवा, स्टेरॉयड्स, सेडेटिव, कई एंटीडिप्रेसेंट्स और केल्शियम-बेटा चैनल ब्लॉकर्स का सेवन करने से शरीर पर विपरित असर पड़ता है।
  • कैमिकल और अन्य : हाट टब में मौजूद एलर्जींस और केमिकल्स के साथ लांड्री डिटरजेंट जैसे प्रोडक्ट, सेंटेड लूब्रिकेंट्स और कंडोम के कारण भी ड्रायनेस की समस्या हो सकती है, जिसके कारण सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या होती है।

इंज्युरी भी है ब्लीडिंग की बड़ी वजह

इंटरकोर्स के दौरान होने वाले फ्रिक्शन के कारण सेंसेटिव जनाइटल टिशू में कटमार्क हो सकता है। वहीं शिशु के जन्म के कारण भी वजाइनल टिशू स्ट्रेच होती है। कई मामलों में चोट लगने की संभावनाएं अधिक होती हैं। कोई भी महिला जब पहली बार सेक्स करती है तो वजाइनल स्किन का एक छोटा फ्लैप जिसे हायमिन (hymen) कहा जाता है, स्ट्रेचिंग होने के कारण टूट जाता है। इसके कारण बेहद ही कम मात्रा में ब्लीडिंग होती है, जो एक से दो दिनों में ठीक हो जाता है।

इंफेक्शन की वजह से

किसी भी प्रकार का इंफेक्शन वजाइनल टिशू में सूजन का कारण बन सकता है, वहीं इसके कारण सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। सामान्य तौर पर ऐसा यीस्ट इंफेक्शन के कारण, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, सर्विसाइटिस (cervicitis), वेजिनिटिस (vaginitis) और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन जैसे क्लैमाइडिया और गोनोरिया के कारण हो सकता है।

सर्वाइकल डिसप्लेसिया (Cervical dysplasia) हो सकता है कारण

जब महिलाओं के सर्विकल केनल की लाइनिंग (जो योनि और गर्भाशय को अलग रखने का काम करती है) में असामान्य और प्री कैंसरस सेल्स विकसित हो जाते हैं, उसी को सर्विकल डिस्प्लेसिया कहा जाता है। इसके कारण इरीटेशन होने के साथ प्राइवेट पार्ट के टिशू को नुकसान पहुंच सकता है, खासतौर पर सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

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एंडोमेट्रियोसिस के कारणों को जानें 

एंडोमेट्रियोसिस के कारण एंडोमेट्रियल टिशू, यह वो टिशू होते हैं जो यूट्रस की रेखा बनाते हैं, इस स्थिति में यह यूट्रस के बाहर पनप जाते हैं। इसके कारण पेल्विक रीजन और लोअर एब्डॉमिन में सूजन की समस्या होती है।

 सर्वाइकल एकट्रोपियन (Cervical ectropion)

कई मामलों में देखा गया है कि सर्वाइकल केनल के अंदर ग्लैडुलर सेल्स असामान्य रूप से सर्विक्स के बाहर विकसित हो जाते हैं। यह समस्या बिना किसी ट्रीटमेंट के ही ठीक हो जाती है, इसके कारण सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

सर्वाइकल और एंडोमेट्रियल पॉलिप्स और फाइब्रॉयड्स के कारण

पॉलिप्स और फाइब्रॉइड्स के कारण छोटे नॉन कैंसरस ग्रोथ डेवलप हो जाते हैं। सामान्य तौर पर यह सर्विक्स और यूट्रस की लाइनिंग में पनपते हैं। वहीं इसके कारण – सेक्स के बाद ब्लीडिंग और दर्द की समस्या हो सकती है।

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एनाटॉमिकल एब्नार्मेलिटी की वजह से ब्लीडिंग

कुछ लोगों में देखा गया है कि उनके रिप्रोडक्टिव ऑर्गन अलग अलग शेप के होते हैं, इसके कारण इंटरकोर्स के दौरान दर्दनाक घर्षण हो सकता है। वहीं सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या भी हो सकती है।

ब्लीडिंग डिसऑर्डर भी बड़ी वजह

वैसी बीमारी जिनसे कारण असामान्य ब्लीडिंग होती है या फिर क्लोटिंग होती है, संभावनाएं रहती है कि उसकी वजह से पोस्टकोइटल ब्लीडिंग हो। खून को पतला करने वाली दवा का सेवन करने के कारण भी इस प्रकार का प्रभाव देखने को मिलता है।

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कैंसर को न करें नजरअंदाज

कैंसर जो रिप्रोडक्टिव सिस्टम के साथ यूरोजेनाइटल ट्रैक में होते हैं वो वजाइनल टिशू के कारण हार्मोन लेवल को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं डैमेज भी कर सकते हैं। सर्विक्स और यूटेराइन कैंसर के कारण पोस्टकोलइटल ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इस अवस्था में भी सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

पोस्टकोइटल ब्लीडिंग (सेक्स के बाद ब्लीडिंग) होने के रिस्क फैक्टर्स

  • वजाइनल ड्राइनेस
  • एग्रेसिव इंटरकोर्स
  • इम्मयून कंडीशन
  • बिना कंडोम के सेक्स करने के कारण
  • सेक्सुअल एक्सपीरिएंस की कमी के कारण
  • हाई ब्लड प्रेशर के कारण
  • इरीटेंट कैमिकल्स और एलर्जींस के संपर्क में आने के कारण
  • वजाइनल और यूटेराइन इंफेक्शन के कारण
  • डायबिटीज की वजह से
  • इंटरकोर्स और इंटीमेसी के दौरान एंजाइटी के कारण
  • परिवार में किसी को सर्वाइकल और यूटेराइन कैंसर की बीमारी होने पर
  • परिवार में किसी को वजाइनल ड्रायनेस और सूजन की समस्या होने के कारण
  • इम्यूनो सप्रेसेंट मेडिटेशन (immunosuppressant medications)
  • डिहाइड्रेशन

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जानें कैसे लगाया जाता है बीमारी का पता

सेक्स के बाद ब्लीडिंग का पता करने के लिए कोई भी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं है ताकि पोस्टकोइटल ब्लीडिंग का पता कर उसे मैनेज किया जा सके। ऐसे में कुछ डॉक्टर मरीजों से उनके परिवार की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी पूछ सकते हैं। इसके बाद ही मेडिकल इग्जामिनेशन की ओर बढ़ते हैं।

सेक्स के बाद ब्लीडिंग के कारणों की जांच के लिए डॉक्टर कराते हैं यह टेस्ट

सेक्स के बाद ब्लीडिंग के कारणों की जांच यदि डॉक्टर न कर पाए तो ऐसी स्थिति में वो मरीज को गायनोकोलॉजिस्ट से सलाह लेने की राय देते हैं।

सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने से कब लें डॉक्टरी सलाह

सेक्स के बाद ब्लीडिंग न रूकने पर, गंभीर, लगातार और कम-कम कर ब्लीडिंग होता रहे तो ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। वहीं सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने के कारण यदि आपको इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे तो उसे भी डॉक्टर से साझा करनी चाहिए, जैसे

  • इंटरकोर्स के दौरान बर्निंग सेनसेशन या पेशाब करने के दौरान जलन
  • जी मचलाना, उल्टी और भूख में कमी
  • एब्डॉमिनल पेन
  • एब्नॉर्मल डिस्चार्ज
  • वजाइनल बर्निंग और सेंसेशन
  • लोअर बैक पेन
  • काफी तेज थकान और कमजोरी
  • सिर दर्द
  • असामान्य पेल स्किन
  • ब्लैडर और बॉवेल सिंड्रोम का होना

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जानें क्या-क्या है ट्रीटमेंट

सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में बीमारी का पता कर एक्सपर्ट उसके अनुसार ही ट्रीटमेंट करते हैं। इलाज करने के लिए डॉक्टर इन विकल्पों को कर सकते हैं शामिल, जैसे-

  • वजाइनल मॉश्चराइजर
  • गोनोरिया, सिफलिस और क्लैमिडिया के कारण बैक्टीरिया जनित इंफेक्शन को ठीक करने के लिए एंटीबायटिक दी जाती है
  • वायरल इंफेक्शन यदि है तो उसके लिए दवा
  • सर्वाइकल इक्ट्रॉपियन (cervical ectropion) के केस में सर्जिकल रिमूवल, क्रायोथेरेपी (cryotherapy), इलेक्ट्रोकॉट्री (electrocautery ) का कर सकते हैं इस्तेमाल
  • ब्लीडिंग का कारण और असामान्य रूप से विकसित पॉलीप्स (polyps) को हटाकर
  • कैंसर की सर्जरी व थैरेपी के द्वारा उपचार कर
  • वजाइनल ड्रायनेस को कम करने के लिए क्रीम, सपोसिटोरीज और रिंग के रूप में वजाइनल इस्ट्रोजन का लो डोज देकर

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प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स के बाद ब्लीडिंग

प्रेग्नेंसी, शिशु का जन्म और ब्रेस्ट फिडिंग के दौरान हमारे शरीर का हार्मोन काफी तेजी से बदलता है। संभावनाएं रहती है कि इसके कारण वजाइनल टिशू कहीं डैमेज न हो जाए। प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में यदि ब्लीडिंग हो तो उसको लेकर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। वहीं प्रेग्नेंसी के आखिरी दिनों में यदि ब्लीडिंग हो तो जरूरी है कि जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह ली जाए, इस स्थिति में मेडिकल इमरजेंसी तक की जरूरत पड़ सकती है। यह एक प्रकार से प्रीटर्म लेबर का लक्षण होता है।

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ऐसे करें बचाव

सेक्स के बाद ब्लीडिंग यदि कम हो तो उस स्थिति में उपचार की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन ब्लीडिंग लगातार होती रहे तो उस अवस्था में इलाज की जरूरत पड़ती है।

आप इन तरीकों को आजमाकर कर सकते हैं बचाव

  • एग्रेसिव सेक्स न कर
  • रोजाना वजाइनल मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें, नियमित रूप से पानी पीते रहें
  • सेक्स के दौरान वाटर बेस्ड और सिलिकॉन बेस्ड लूब्रिकेंट्स का इस्तेमाल करें
  • किसी दूसरे सेक्सुअल पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाने के दौरान हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें
  • इंटरकोर्स के पहले हमेशा कामोत्तेजना से भरपूर होना चाहिए
  • किसी प्रकार का इंफेक्शन होने पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए

सेक्स के बाद ब्लीडिंग से बचाव के लिए लोगों को वैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें एस्ट्रोजन और फायटोएस्ट्रोजन (phytoestrogens) की मात्रा हो।

ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें काफी मात्रा में होते हैं फायटोएस्ट्रोजन

  • ऑलिव ऑयल
  • सेब
  • अंगूर
  • गाजर
  • सीसेम सीड्स
  • फ्लैक्स सीड्स
  • लेंटिलिस
  • ओट्स
  • आल्मंड
  • वालनट्स
  • सनफ्लावर सीड्स

सेक्स के बाद ब्लीडिंग है सामान्य, लंबे समय तक हो तो लें डॉक्टरी सलाह

सेक्स के बाद ब्लीडिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। यदि कोई कपल पहली बार सेक्स कर रहे हैं तो यह स्वभाविक है कि ब्लीडिंग हो। वहीं वैसी महिलाएं जिनका पीरियड आना बंद हो गया हो या फिर ओवरी की अन्य जटिलताओं से जूझ रही हैं तो वैसी महिलाओं को सेक्स के बाद ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

वहीं वैसी महिलाएं जिनको मासिक धर्म समय पर आता हो उन महिलाओं को सेक्स के बाद ब्लीडिंग होने पर वह अपने आप ही कुछ समय में ठीक हो जाता है। लेकिन गंभीर, लगातार और क्रॉनिक मामलों में ब्लीडिंग की समस्या को लेकर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।

वैसे लोग जिनमें हार्मोनल बदलाव के दौरान पोस्टकोलाइटल ब्लीडिंग हो, जैसे मासिक धर्म के दौरान, गर्भावस्था के दौरान, शिशु को दूध पिलाने के दौरान यदि हो तो उन्हें डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। सेक्स से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अगर आपका कोई सवाल है, तो कृपया इस बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानीडेंटिस्ट्री · Consultant Orthodontist
Satish singh द्वारा लिखित · अपडेटेड 02/03/2021