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बीड़ी और सिगरेट दोनों हैं ही है जानलेवा!

बीड़ी और सिगरेट दोनों हैं ही है जानलेवा!

अलग-अलग संस्थानों के अनुमानों के मुताबिक दुनिया भर में करीब 100 करोड़ लोग में धूम्रपान की लत है। जिसमें बीड़ी और सिगरेट पीने वालों की संख्या सबसे अधिक होती है। इसके बाद शराब पीने, हुक्का पीने और पान-गुठखा खाने वालों की भी संख्या लगातार बढ़ रही है। बीड़ी और सिगरेट की बात करें, तो दोनों में ही तम्बाकू का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, तम्बाकू के सेवन से लगभग 40 तरह के कैंसर होने का खतरा बना रहता है, जिसमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेन ट्यूमर जैसे कई जानलेवा कैंसर के प्रकार हो सकते हैं।

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बीड़ी और सिगरेट (Bidi and cigarette) का स्वास्थ्य पर असर

बीड़ी और सिगरेट पीने के कारण सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या देखी जाती है। इसके अलावा तम्बाकू के सेवन के कारण हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या में भी इजाफा देखा जाता है। हर साल लगभग 40 लाख लोग फेफड़े से संबधित तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। ग्लोबल अडल्ट टोबेको सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10.7 फीसदी वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं। जिसमें 19 फीसदी पुरुष और 2 फीसदी महिलाएं भी शामिल हैं। बता दें कि, बीड़ी और सिगरेट के मामले में सिर्फ भारत में ही बीड़ी का इस्तेमाल सबसे अधिक देखा जाता है। इस 10.7 फीसदी के आंकड़ों में सिगरेट पीने वाले पुरुषों की संख्या 7.3 फीसदी और 0.6 फीसदी महिलाओं की संख्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाएं सिगरेट के मुकाबले बीड़ी ज्यादा पीती हैं भारत में सिर्फ बीड़ी पीने वाली महिलाओं की संख्या है 1.2 फीसदी है।

रिसर्च फैक्ट में मिला बीड़ी और सिगरेट (Bidi and cigarette) से जुड़ा चौंकाने वाला आंकड़ा

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (गेट्स) 2016-17 की फैक्ट शीट के रिपोर्ट चौंकाने वाले थे। गेट्स-2 सर्वे की रिपोर्ट में 15 साल की उम्र से अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया गया था। केंद्रीय परिवार कल्याण विभाग, विश्व स्वास्थ्य संगठन और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई द्वारा इस रिसर्च के लिए मल्टी स्टेज सैंपल डिजाइन तैयार किया गया। इसमें देशभर से कुल 74,037 लोगों को शामिल किया गया था। जिसमें से 1,685 पुरुष और 1,779 महिलाएं उत्तर प्रदेश की थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व की कुल आबादी की हर छठी महिला किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन कर रही है। जिनमें मजदूरी करने वाली महिलाएं और हाई प्रोफाइल पेशे से जुड़ी महिलाओं की संख्या अधिक है। मजदूरी करने वाली महिलाएं गुटखा, खैनी, बीड़ी का सेवन सबसे ज्यादा करती हैं, वहीं शौकिया तौर पर महिलाओं में सिगरेट पीने व गुटखा खाने की आदत भी काफी देखी जाती है। गेट्स सर्वेक्षण 2009-10 के अनुसार बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्र की तुलना में खैनी का सेवन अधिक किया जाता है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में लगभग 28 फीसदी लोगों अपनी आदत या स्वाद की पसंद के अनुसार खैनी का सेवन करते हैं, जबकि शहरों में लगभग 24.8 फीसदी लोग खैनी का सेवन करते हैं। इस सर्वे के दौरान यह बात भी सामने आई कि भारत में तम्बाकू से बने उत्पादों का सबसे ज्यादा उपभोग भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में किया जाता है। वहां लगभग 67 फीसदी बीड़ी और सिगरेट का सेवन किया जाता है।

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केरल में भी अधिक है बीड़ी और सिगरेट (Bidi and cigarette) का इस्तेमाल

साल 1990-2009 के बीच भारत के केरल राज्य के शहर कोल्लम जिले के कुरुनागापल्ली में बीड़ी और सिगरेट से जुड़ा एक अध्ययन किया था। जिसमें करीब 65,000 लोगों को शामिल किया था। अध्ययन में शामिल लोगों की उम्र 30 से 40 साल के बीच की थी। इस अध्ययन के दौरान शोधाकर्ताओं ने पाया था कि जो लोग बीड़ी और सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा अधिक देखा गया। हालांकि, कैंसर का सबसे अधिक जोखिम बीड़ी पीने वालों में देखा गया। यह अध्ययन कोल्लम के रीजनल कैंसर सेंटर द्वारा किया गया था, जिसे ‘गैस्ट्रोइंटरोलॉजी’ की विश्व पत्रिका में प्रकाशित भी किया गया है। शोध में पाया गया कि वहां पर अधिकतर लोगों ने बीड़ी पीना महज 18 साल की कम उम्र में ही शुरू कर दिया था। ऐसे लोगों में 18 से 22 उम्र के बीच 2.0 तक कैंसर का खतरा और 1.8 पेट के कैंसर होने का खतरा देखा गया।

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बीड़ी और सिगरेट में भारत में बीड़ी का चलन ज्यादा क्यों?

बीड़ी और सिगरेट की बात करें तो भारत में सिगरेट के मुकाबले बीड़ी का सेवन अधिक किया जाता है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है इसकी खेती। बीड़ी को भारतीय सिगरेट और गरीब लोगों का सिगरेट भी कहा जाता है। इसके अलावा भारत के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में मजूदर वर्ग की संख्या भी अधिक होती है। जो दिहाड़ी के तौर पर छोटे-मोटे काम करते हैं। वहीं, बीड़ी दाम में सिगरेट के मुकाबले काफी सस्ती भी होती है।

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बीड़ी कैसे बनती है?

बीड़ी तेन्दु के पौधे से बनाई जाती है। तेंदू के पत्ते के अन्दर तम्बाकू को भर कर इसे लपेट कर तैयार किया जाता है। जिसे सिगरेट की तरह ही आग से सुलगाकर पिया जाता है। इसके अलावा बीड़ी का नाम भी भारतीय चलन के तर्ज पर ही रखा गया है। दरअसल, भारत में सदियों से ही पान खाने का चलन रहा है। पान के पत्तों के अंदर सुपारी और अन्य मसालों को रखा जाता है जिसे बीड़ा कहा जाता है। इसी बीड़ा के तर्ज पर बीड़ी का भी नामकरण किया गया है। पान के बीड़ा की ही तरह बीड़ी बनाने के लिए भी तेन्दु के पत्तों के अंदर तम्बाकू को भरा जाता है। बीड़ी का निर्माण भारत और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में किया जाता है और 100 से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है।

इसके अलावा, सिगरेट की तरह ही बीड़ी भी विभिन्न प्रकार के स्वादों में उत्पादित की जाती है, जो चॉकलेट, आम, वेनिला, नींबू-चूना, पुदीना, अनानास और चेरी जैसे फ्लेवर में आसानी से पाया जा सकता है। जिसके कारण बच्चे भी इसके आदि हो सकते हैं।

बीड़ी और सिगरेट (Bidi and cigarette) पर क्या है डॉक्टर्स की राय

डॉक्टरों के अनुसार एक बीड़ी बनाने में 0.2 ग्राम तम्बाकू का इस्तेमाल किया जाता है और एक सिगरेट में 0.8 ग्राम तम्बाकू की मात्रा पाई जाती है। जिसके कारण लोगों को ऐसा लग सकता है कि बीड़ी पीने के जोखिम सिगरेट पीने के जोखिम से कम हो सकता है। लेकिन लोगों का ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बीड़ी और सिगरेट में बीड़ी ज्यादा नुकासनदायक होता है।

भारत के साथ-साथ 1990 के मध्य में अमेरिका जैसे विकसित देश में भी बीड़ी और सिगरेट का क्रेज काफी बढ़ गया था। जिसे देखते हुए वहां की सरकार को इसे प्रबंध करने के तरीकों पर विचार करना पड़ा। साल 2014 के शुरूआत में ही अेमेरिकी सरकार ने देश में कई बड़े बीड़ी उत्पादक कंपनियों पर बैन लगा दिया था।

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बीड़ी और सिगरेट में क्या है ज्यादा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

विभिन्न आंकड़ों के मुताबिक बीड़ी सिगरेट के मुकाबले स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक है। जिसके निम्न मुख्य कारक हैंः

  • बीड़ी के धुएं में सिगरेट के धुएं के मुकाबले निकोटीन की तीन से पांच गुना अधिक मात्रा होती है।
  • एक बीड़ी में नियमित सिगरेट की तुलना में अधिक टार और कार्बन मोनोऑक्साइड होता है।
  • बीड़ी में सिगरेट की तरह कोई लाइनिंग या फिल्टर नहीं होती है, जिसके कारण ज्यादा धुआं शरीर के अंदर जाता है, जबकि सिगरेट में फिल्टर होने की वजह से धुएं कम मात्रा में शरीर के अंदर जाता है।
  • बीड़ी में किसी तरह की कवरिंग भी नहीं होती है।
  • बीड़ी पीने के लिए सिगरेट के मुकाबले सांस खीचने में अधिक जोर लगाना पड़ता है। जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक सिगरेट की तुलना में बीड़ी पीने से अधिक मात्रा में विषाक्त पदार्थों सांस में घुलते हैं।
  • नियमित सिगरेट का 9 कश बीड़ी के लगभग 28 कश के बराबर होता है।

बीड़ी और सिगरेट पीने के स्वास्थ्य जोखिम को समझें

  • बीड़ी और सिगरेट दोनों में ही तम्बाकू का इस्तेमाल किया जाता है। तम्बाकू में अलग-अलग प्रकार के कुल 44 केमिकल्स पाए जाते हैं। जो लोग बीड़ी पीते हैं, उनमें मुंह के कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, पेट के कैंसर और एसोफैगल कैंसर के खतरे सिगरेट पीने वालों के मुकाबले 10 गुणा अधिक होता है।
  • कैंसर के जोखिम के साथ-साथ बीड़ी पीने वाले लोगों में दिल की बीमारी और दिल का दौरा पड़ने का खतरा सिगरेट पीने वालों के मुकाबले तीन गुणा अधिक होता है।
  • बीड़ी पीने के कारण वातस्फीति के जोखिम भी बढ़ जाते हैं जो क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के जोखिम को चार गुणा बढ़ावा दे सकता है।
  • स्मोकिंग के कारण थायरॉइड ग्रंथि, मेटाबॉलिज्म और शरीर में इंसुलिन की कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। जिसके कारण ग्रेव्स हायपरथायरॉइडिज्म, ऑस्टियोपोरोसिस और प्रजनन क्षमता से जुड़े जोखिम गंभीर हो सकते हैं। धूम्रपान की आदत शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध के विकास को बढ़ावा देता है जिससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है और टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • स्मोकिंग की आदत भविष्य में होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को भी शारीरिक और मानिसक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान बीड़ी और सिगरेट पीने से महिला में कैटेकोलामाइन हार्मोन के उत्पादन में वृद्धि होती है, जो कि फाइटोप्लासेंटल यूनिट को फैला सकता है।
  • स्मोकिंग से खून की नसें प्रभावित होती है जिसका कारण हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
  • शरीर में जाने वाले धुआं खून में फैटी एसिड की मात्रा को बढ़ाता है।
  • निकोटीन की अधिक मात्रा शरीर में जाने पर सेट्रल नर्वस सिस्टम की उत्तोजना बढ़ सकती है जो बेहोशी का कारण बन सकता है।

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आपको जानकर हैरानी होगी की अमेरिका में बीड़ी पीने की लत स्कूल के बच्चों में अधिक देखी गई है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में अमेरिका में स्कूल जाने वाले बच्चों में बीड़ी पीने का आंकड़ा निम्न थाः

  • मिडिल स्कूल के छात्रों की संख्या 0.3 फीसदी
  • हाई स्कूल के सभी छात्रों की संख्या 0.7 फीसदी, जिसमें महिलाओं की संख्या 0.6 फीसदी और पुरुषों की संख्या 0.7 फीसदी थी।

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बीड़ी और सिगरेट (Bidi and cigarette) पीने की आदत से कैसे छोड़ी जा सकती है?

जब भी कोई शख्स बीड़ी या सिगरेट पीता है, तो निकोटिन शरीर के ऐसे कुछ हर्मोन्स जैसे स्टेरॉइड, कोर्टिसोल, एस्ट्रोजन के उत्पादन को बढ़ा देता है। जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही, खुशी का अनुभव कराने वाले हार्मोन डोपामाइन के उत्पादन को भी स्कोमिंग बढ़ाता है। निकोटीन जब सिगरेट के माध्यम से शरीर में जाता है, तो हमारे मस्तिष्क में रिसेप्टर्स नामक सामान्य रूप से मौजूद संरचनाओं को सक्रिय करता है। जब ये रिसेप्टर्स सक्रिय हो जाते हैं, तो वे डोपामाइन हार्मोन को ब्रेन में रिलीज करता है, जिससे हमें अच्छा महसूस करता है। डोपामाइन खुशी की प्रतिक्रिया जाहिर करने का कार्य करता है और यही वजह भी है कि लोग जल्दी से स्मोकिंग के आदी हो जाते हैं। ऐसे में जब भी कोई स्मोकिंग नहीं करने का फैसला लेता है, तो स्मोकिंग करने के दौरान के मुकाबले स्मोकिंग न करने के दौरान अधिक दुखी महसूस कर सकता है। जिसके कारण लोगों को निम्न स्थितियों का भी आभास हो सकता है, जैसेः

  • सिरदर्द महसूस करना
  • चक्कर आना
  • किसी काम में मन नहीं लगना
  • सांस फूलना
  • बहुत जल्दी गुस्सा हो जाना
  • भूख में कमी या बहुत ज्यादा भूख लगना
  • बेहोशी आना

हालांकि, स्मोकिंग छोड़ने के इस तरह के सभी लक्षण अगले कुछ ही दिनों में दूर हो जाते हैं। हालांकि, एक बार स्मोकिंग की आदत छोड़ चुका व्यक्ति दूसरी बार स्मोकिंग की तरफ जल्दी आर्किषत हो सकता है।

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बीड़ी और सिगरेट छोड़ने का सही तरीका क्या है? (Best way to quiet Bidi and cigarette)

तम्बाकू की लत छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन स्मोकिंग की आदत से छुटकारा पाया जा सकता है। जिसके लिए आप निम्न तरीकों का सहारा ले सकते हैंः

ग्रुप ज्वाइन करें

ऐसे कई संस्थान हैं, जो लोगों के नशे की आदत को छुड़ाने में उनकी मदद करते हैं। आप इस तरह के संस्थानों की मदद ले सकते हैं।

लोगों के अनुभव को समझें

ऐसे लोगों से मिले जिन्होंने अपनी स्मोकिंग की आदत से छुटकारा पाया हो। उनके अनुभव को जानने का प्रयास करें। स्मोकिंग छोड़ने के बाद उनके जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं, इस पर उनसे बात करें और उनसे सहायता के लिए भी कह सकते हैं।

दवाओं का सेवन करें

स्मोकिंग की आदत छुड़ाने के लिए कई तरह की दवाओं का सेवन किया जाता है। जो कैंडी और च्यूंगम के रूप में आसानी से मिल सकते हैं। डॉक्टर की सलाह पर आप इनका सेवन कर सकते हैं।

एक्सरसाइज और योग करें

मन को शांत करने वाले एक्सरसाइज और योग कर सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड