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कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स : ये रखेंगी आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल का ख्याल!

कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स : ये रखेंगी आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल का ख्याल!

कोलेस्ट्रॉल एक वैक्सी, फैट के जैसी चीज को कहा जाता है, जो शरीर की हर कोशिका में पाई जाती है। हमारे शरीर को हॉर्मोन्स (Hormones), विटामिन-डी (Vitamin-D) और अन्य चीजों जो खाने को पचाने में मददगार हैं, उन्हें बनाने के लिए थोड़े कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है। हमारा शरीर जितना कोलेस्ट्रॉल चाहिए होता है, उतना बना लेता है। कोलेस्ट्रॉल एनिमल सोर्सेज के खाद्य पदाथों में भी पाया जाता है जैसे अंडे की जर्दी (Egg Yolk), मीट (Meat) और चीज (Cheese) आदि। आज हम कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ बात करने वाले हैं कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) के बारे में। जानिए इनके बारे में विस्तार से। शुरुआत करते हैं कोलेस्ट्रॉल और इसके कारणों से।

कोलेस्ट्रॉल क्या है? (Cholesterol)

कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) से पहले कोलेस्ट्रॉल के बारे में जानना जरूरी है। अगर खून में कोलेस्ट्रॉल अधिक हो जाए, तो यह खून में अन्य चीजों के साथ मिल जाता है और प्लाक (Plaque) बनता है। प्लाक, आर्टरीज की वॉल्स (Arteries Walls) से चिपक जाते हैं। प्लाक के इस निर्माण को एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) के रूप में जाना जाता है। इसके कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) भी हो सकती हैं। जिसमें कोरोनरी आर्टरीज तंग हो जाती हैं या ब्लॉक भी हो सकती हैं।

कोलेस्ट्रॉल अच्छा या बुरा दोनों तरह का हो सकता है। सामान्य स्तर पर, यह शरीर के लिए एक आवश्यक पदार्थ है। हालांकि, अगर खून में इसकी कॉन्सेंट्रेशन बहुत अधिक हो जाती है, तो यह एक खतरा बन जाता है जिससे हार्ट अटैक (Heart Attack) का जोखिम बढ़ सकता है। हाय कोलेस्ट्रॉल का सबसे सामान्य कारण है अनहेल्दी लाइफस्टाइल। इसके अलावा अन्य कारण इस प्रकार हैं:

Cholesterol Modifying Medications

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  1. अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स (Unhealthy Eating Habits) : बहुत अधिक बुरे फैट्स का सेवन करना जैसे डेयरी उत्पादों, मीट्स, चॉकलेट, तली हुई चीजें आदि, इस समस्या का कारण बन सकता है।
  2. फिजिकल एक्टिविटी की कमी (Lack of Physical Activity) : अधिक बैठे रहना और व्यायाम कम करने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है
  3. स्मोकिंग (Smoking) : स्मोकिंग करने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है खासतौर पर महिलाओं में। यही नहीं इससे बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढ़ती है।
  4. जेनेटिक (Genetic) : जेनेटिक से भी कोलेस्ट्रॉल की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है। हाय कोलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ाने के रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं:

1.उम्र (Age)

2.हेरीडिटी (Heredity)

3. वजन (Weight)

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कोलेस्ट्रॉल का निदान (Diagnosis of Cholesterol)

कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) से पहले इसका निदान कैसे होता है, इसके बारे में जान लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि बीस साल की उम्र के बाद सबको कम से कम हर पांच साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच अवश्य करानी चाहिए। क्योंकि, हाय कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नहीं होते। इसलिए बहुत से लोगों को यह पता भी नहीं होता कि उनमें कोलेस्ट्रॉल का लेवल अधिक है।इसके निदान के लिए एक सिंपल ब्लड टेस्ट जिसे लिपोप्रोटीन प्रोफाइल (Lipoprotein Profile) कराया जाता सकता है। इसके साथ ही पूरी शारीरिक जांच भी की जाती है।

इसके साथ ही मेडिकल हिस्ट्री, हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को भी जांचा जाता है। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल अधिक है। खासतौर, पर अगर आपको हार्ट डिजीज के लिए रिस्क फैक्टर की संभावना अधिक है, तो डॉक्टर आपको उपचार के तरीकों में अपने लाइफस्टाइल और खाने-पीने में बदलाव करने के लिए कहेंगे। इसके साथ ही कोलेस्ट्रॉल के लेवल को लो करने के लिए दवाइयां भी दी जा सकती हैं। अब जानिए कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) के बारे में विस्तार से:

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कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications)

अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level) हाय है, तो डॉक्टर उसे अपनी डायट में बदलाव करने को कहेंगे जैसे कम सैचुरेटेड फैट, नो ट्रांस फैट, कम चीनी का सेवन आदि। इसके साथ ही मरीज को अधिक शारीरिक रूप से एक्टिव रहने के लिए भी कहा जाता है। लेकिन, अगर इससे बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर लो नहीं होता है, तो डॉक्टर आपको दवाइयों की सलाह भी दे सकते हैं। जानिए कौन सी हैं यह कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications):

स्टैटिन्स (Statins)

स्टैटिन्स पहली तरह की दवा है जो डॉक्टर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (Low-Density Lipoprotein) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह दवाइयां ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) को भी कम करती हैं, जो एक अन्य प्रकार के बैड फैट होते हैं, और आपके अच्छे हाय-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (High-Density Lipoprotein) कोलेस्ट्रॉल को हल्के ढंग से बढ़ाते हैं। स्टैटिन्स में यह सब शामिल हैं:

  • एटोरवास्टैटिन (Atorvastatin)
  • फ्लूवास्टैटिन (Fluvastatin )
  • लोवेस्टैटिन (Lovastatin)
  • पिटावास्टैटिन(Pitavastatin)
  • प्रेवेस्टैटिन (Pravastatin)

स्टडी के अनुसार स्टैटिन्स के प्रयोग से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज जैसे हार्ट अटैक की संभावना भी कम होती है। लेकिन, इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं जैसे:

साइड इफेक्ट (Side Effect)

स्टैटिन्स के कुछ साइड इफेक्ट भी हैं जैसे इंटेस्टायनल समस्याएं, लिवर डैमेज या मांसपेशियों में सूजन। यही नहीं, इनसे हाय ब्लड शुगर (High Blood Sugar) और टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) का जोखिम भी बढ़ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम होती है।

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PCSK9 इन्हिबिटर्स (PCSK9 Inhibitors)

कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) में अगली है PCSK9 इन्हिबिटर्स। इस दवा की सलाह उन लोगों के लिए दी जाती है जिन्हें लाइफस्टाइल में बदलाव या स्टैटिन के प्रयोग से कोई फायदा नहीं होता। यह दवाइयां एक प्रोटीन जिसे PCSK9 कहा जाता है, को ब्लॉक करती हैं, जिससे हमारे शरीर के लिए खून से बैड कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol) की मात्रा को कम करने में मदद मिलती है।

यह दवाइयां अधिकतर उन लोगों द्वारा प्रयोग की जाती है जिन्हें हेट्रोजायगस फेमिलियल हायपरकोलेस्ट्रॉलमिया (Heterozygous Familial Hypercholesterolemia) नामक एक जेनेटिक कंडीशन (Genetic Condition) विरासत में मिली हो। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • अलिरोक्यूमेब (Alirocumab)
  • एवोलोक्यूमैब(Evolocumab)

साइड इफेक्ट्स (Side Effects)

क्योंकि, यह कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) अभी नई है, तो अभी इनके साइड इफेक्ट के बारे में जानने में कुछ समय लगेगा। लेकिन, ऐसा माना जाता है कि अलिरोक्यूमेब (Alirocumab) से फ्लू और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों के साथ ही सूजन, दर्द या खुजली आदि हो सकती है। एवोलोक्यूमैब से भी कुछ लोग पीठ दर्द, सर्दी-जुकाम या स्किन रिएक्शंस महसूस कर सकते हैं।

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नियासिन (Niacin)

नायसिन विटामिन B3 का एक प्रकार है, जो खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह सप्लीमेंट्स के रूप में भी मिलता है। इसका उदहारण है नियकोर (Niacor)। शोधकर्ताओं के अनुसार अगर आप पहले ही स्टैटिन का सेवन कर रहे हैं, तो नायसिन का सेवन हार्ट डिजीज (Heart Disease) के जोखिम को कम कर सकता है। इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं खुजली, सिरदर्द, फ्लशिंग आदि।

कोलेस्ट्रॉल मॉडीफीइंग मेडिकेशन्स

फायब्रेट्स (Fibrates)

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) के अनुसार फाइब्रेट्स ऐसी दवाएं हैं जो आपके शरीर में ट्राइग्लिसराइड (Triglyceride) की मात्रा को कम करती हैं और अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकती हैं। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • फेनोफायब्रेट (Fenofibrate)
  • जेमफिब्रोजील (Gemfibrozil)

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एटीपी सिट्रेट लायेस इन्हिबिटर्स (ATP Citrate Lyase Inhibitors)

कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) में अगली है एटीपी सिट्रेट लाइज़ इन्हिबिटर्स (ATP Citrate Lyase Inhibitors)। इनमें बंपीडोयक (Bempedoic) लीवर को कोलेस्ट्रॉल की प्रोसेसिंग को रोकती है। जिन व्यक्तियों को हेट्रोजायगस फेमिलियल हायपरकोलेस्ट्रॉलमिया (Heterozygous Familial Hypercholesterolemia) की समस्या है उनमें बैड” कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए इन्हें बनाया गया है। यही नहीं, यह दवाइयां एथेरोस्क्लेरोसिस कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Atherosclerosis cardiovascular disease) से पीड़ित लोगों में भी बैड कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol) को कम करने में मदद करती है। इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं

साइड इफेक्ट

इसके साइड इफेक्ट्स में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Upper Respiratory Tract Infection), खून में अधिक यूरिक एसिड (Excess Uric Acid) , पीठ में दर्द, पेट में दर्द या बैचैनी, ब्रोंकाइटिस (Bronchitis), एनीमिया (Anemia) आदि शामिल हो सकते हैं। यह तो थी कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स(Cholesterol Modifying Medications) के बारे में जानकारी। अब पाएं इन दवाइयों से जुड़े कुछ खास टिप्स।

कोलेस्ट्रॉल मॉडीफीइंग मेडिकेशन्स

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कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स से संबंधित कुछ टिप्स (Tips For Cholesterol Modifying Medications)

कोलेस्ट्रॉल की स्थिति में जब डॉक्टर रोगी को कुछ दवाइयों की सलाह देते हैं। तो रोगी को भी कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी समस्या से बचा जा सके। जैसे रोगी को इन दवाइयों के बारे में पूरा पता होना चाहिए। इससे जुड़े कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

  • कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) को हर दिन एक ही समय पर लें। डॉक्टर की सलाह के बिना इसे लेना न तो बंद करें न ही इनमें कोई बदलाव करें।
  • मेडिसिन कैलेंडर रखें और रोजाना जब आप अपनी डोज ले लेते हैं, तो कैलेंडर में उसे नोट कर लें। अगर डॉक्टर कोई बदलाव करने की सलाह देते हैं तो उसे भी इसमें नोट करें।
  • ओवर-द-काउंटर दवा (Over-The -Counter Medicine) या हर्बल ट्रीटमेंट (Herbal Treatment) को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • अगर आप एक डोज लेना भूल जाते हैं, तो याद आने पर इसे तुरंत ले लें। लेकिन अगर उस समय अगली डोज का समय हो रहा हो, तो डॉक्टर से एक बार पूछ लें कि आपको उस स्थिति में क्या करना चाहिए। अपनी मर्जी से इसकी ओवरडोज (Overdose) लेने से बचें।
  • किसी यात्रा के दौरान भी दवाइयों को लेना न भूलें। अगर आप अधिक समय तक ट्रेवल कर रहे हैं तो अतिरिक्त दवा को अपने साथ रखें।
  • एनेस्थीसिया के साथ सर्जरी (Surgery) कराने से पहले इन दवाइयों के बारे में डॉक्टर की सलाह लें ।
  • कुछ दवाइयां आपकी हार्ट रेट को प्रभावित कर सकती हैं। इस बारे में भी अपने डॉक्टर से पूछ लें।
  • कुछ दवाइयों को लेते हुए अगर आप एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन करते हैं तो उसके साइड-इफेक्ट होते हैं। यही नहीं इससे दवाइयों के प्रभाव पर भी बुरा असर हो सकता है। ऐसे में इस बारे में भी विशेषज्ञ से जानना बेहद जरूरी है।

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ऐसी कई अन्य कोलेस्ट्रॉल मॉडिफायिंग मेडिकेशन्स (Cholesterol Modifying Medications) मौजूद है, जिनका प्रयोग हाय कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) के उपचार के लिए किया जाता है। इसके साथ ही अभी रिसर्च भी जारी है ताकि कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के नए तरीकों का पता चल सके। अगर आपको इन दवाइयों से कोई साइड इफेक्ट या समस्या होती है, तो डॉक्टर से बात करें। हो सकता है कि बेहतर परिणामों के लिए डॉक्टर आपको अन्य दवाइयों की सलाह दें।

कोलेस्ट्रॉल की दवा के साथ ही रोगी के लिए लाइफस्टाइल में भी परिवर्तन (Change in Lifestyle) करना जरूरी है जैसे हेल्दी डायट (Healthy Diet), नियमित व्यायाम (Daily Exercise), पर्याप्त नींद (Enough Sleep) और तनाव से बचाव (Avoid Stress) आदि। क्योंकि, यह सब भी कोलेस्ट्रॉल लेवल (Cholesterol Level) को प्रभावित कर सकते हैं। आप आपके डॉक्टर और आप पूरे ट्रीटमेंट प्लान (Treatment Plan) पर विचार कर सकते हैं ताकि इस समस्या से बचा जा सके।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड