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इन्फ्लुएंजा को सामान्य बीमारी समझने की गलती न करें, इससे बचाव के बारे में जानें!

इन्फ्लुएंजा को सामान्य बीमारी समझने की गलती न करें, इससे बचाव के बारे में जानें!

इन्फ्लुएंजा (Influenza) एक वायरल संक्रमण है, जो हमारे श्वसन तंत्र (Respiratory System) यानी हमारे नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। इन्फ्लुएंजा (Influenza) को आमतौर पर फ्लू (Flu) कहा जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है और यह समस्या ज्यादातर साल के सर्द महीनों में होती है। अधिकतर लोगों में इन्फ्लुएंजा (Influenza) खुद ही ठीक हो जाता है। लेकिन, कई मामलों में इससे प्रभावित व्यक्ति की स्थिति अधिक खराब हो सकती हैं। कुछ लोगों में इस समस्या का जोखिम बहुत अधिक होता है, जैसे:

  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों में, खासतौर पर 6 महीने से कम
  • 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में
  • जो लोग नर्सिंग होम या अन्य केयर फैसिलिटीज में रहते हैं
  • गर्भवती महिलाएं या प्रसव के दो हफ्ते बाद तक
  • कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को
  • जो लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं जैसे डायबिटीज (Diabetes), मोटापा (Obesity), अस्थमा (Asthma) आदि

यह भी पढ़ें: जानें इस तरह करें फ्लू की जांच और इसे फैलने से कैसे रोकें

इन्फ्लुएंजा कैसे होता है? (Causes of Influenza)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) का नाम उस वायरस के नाम पर पड़ा है जिसके कारण यह होता है। इस वायरस का नाम इन्फ्लुएंजा वायरस (Influenza Virus) है। इस वायरस से संक्रमित लोग खांसते या छींकते हैं और यदि उनके कॉन्टेक्ट में आनेवाले लोग इन बूंदों को सांस, मुंह या आंखों के माध्यम से अपने शरीर के अंदर ले जाते हैं, तो वायरस फैलता है। खांसने या छींकने से निकली बूंदे चीजों के माध्यम से भी दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैल सकती हैं।जिससे कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चे और लोग लंबे समय तक संक्रमित रह सकते हैं।

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इन्फ्लुएंजा के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Influenza)

जब लोगों को इन्फ्लुएंजा (Influenza) होता है, तो वे सर्दी-जुकाम से भी बदतर महसूस करते हैं। फ्लू से बीमार होने वाले बच्चों को आमतौर पर फ्लू के वायरस (Virus) के संपर्क में आने के 2 दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं। इन्फ्लुएंजा के लक्षण (Symptoms of Influenza) इस प्रकार हो सकते हैं:

  • एकदम बुखार होना (Sudden Fever)
  • ठंड लगना (Chills)
  • सिरदर्द (Headache)
  • मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain)
  • सिर चकराना (Dizziness)
  • भूख में कमी (Loss of Appetite)
  • थकान (Fatigue)
  • खांसी (Cough)
  • गले में खराश (Sore Throat)
  • नाक बहना (Running Nose)
  • उलटी अथवा मितली (Vomiting or Nausea)
  • कमजोरी (Weakness)
  • कान का दर्द (Ear Ache)
  • डायरिया (Diarrhea)

इन्फ्लुएंजा का उपचार कैसे किया जाता है? (Treatment of Influenza)

आमतौर पर, इन्फ्लुएंजा के उपचार (Treatment of Influenza) के लिए पर्याप्त आराम और बहुत अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने के लिए कहा जाता है। लेकिन अगर आपको यह इंफेक्शन गंभीर है या जटिलताओं का खतरा अधिक है, तो डॉक्टर आपको एंटीवायरल दवाईयां (Antiviral Medicine) भी दे सकते हैं ताकि फ्लू ठीक हो सके। यह दवाईयां इस प्रकार हैं – ओसेल्टामिविर (Oseltamivir), ज़नामिविर (Zanamivir) आदि। ये दवाएं आपकी बीमारी को कम कर सकती हैं और गंभीर जटिलताओं को रोकने में भी सहायक हैं।

ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) एक ओरल दवा है। ज़नामविर (Zanamivir) को अस्थमा इन्हेलर के समान एक उपकरण के माध्यम से सांस द्वारा लिया जाता है। लेकिन, अगर किसी को कुछ पुरानी सांस संबंधी समस्याएं जैसे अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी है तो इनका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

इन्फ्लुएंजा से कैसे बचा जा सकता है? (Influenza Prevention)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) या फ्लू की रोकथाम के लिए 6 महीने या इससे अधिक उम्र के लोगों को वार्षिक फ्लू वैक्सीनेशन (Yearly vaccination) कराने की सलाह दी जाती है। इससे फ्लू होने का जोखिम कम हो जाता है और फ्लू से होने वाली जटिलताओं को भी रोका जा सकता है। इसके अलावा इन्फ्लुएंजा की रोकथाम (Influenza Prevention) के अन्य कुछ तरीके भी हैं, जैसे:

नजदीकी कॉन्टेक्ट से बचें (Avoid Close Contact with patients)

जो लोग बीमार हैं, उनके कॉन्टेक्ट में आने से बचें। अगर आप बीमार हैं तो आप भी दूसरे लोगों के संपर्क में न आएं। जब आप बीमार हों, तब घर पर ही रहें। फ्लू (Flu) होने पर काम पर या स्कूल आदि जाने से बचें। इससे दूसरे लोग भी बीमार हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने से पहले जान लें जुकाम और फ्लू के प्रकार

नाक या मुंह को ढकें (Cover your Nose and Mouth)

जब भी आपको खांसी या जुकाम हो, अपने नाक को रुमाल या टिश्यू से ढंक लें। आजकल की स्थिति को देखते हुए हमेशा मास्क लगा कर रखें, खासतौर पर जब आप घर से बाहर हों।

हाथों को धोते रहें (Wash your hands)

हाथों को धोने से आप रोगाणुओं से बच सकते हैं। अगर साबुन या पानी मौजूद न हो तो एल्कोहॉल बेस्ड सैनिटाइज़र का प्रयोग करें।

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अपने मुंह, आंख या नाक को न छुएं (Don’t Touch Your Mouth, Eyes or Nose)

जब आप किसी दूषित जगह को छूते हैं, तो रोगाणु आपके हाथों में आ जाते हैं। इसके बाद जब उसी हाथ से आप अपने आंख, मुंह या नाक को छूते हैं, तो यह हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे आप बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए, बार-बार अपनी आंखों, नाक या मुंह को न छुएं।

इन्फ्लुएंजा

अच्छी आदतें अपनाएं (Follow good habits)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) से बचने के लिए अच्छी आदतें अपनाएं, जैसे भरपूर नींद लें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, तनाव से बचे और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें व पौष्टिक आहार लें।

इन्फ्लुएंजा में खानपान का ध्यान कैसे रखें? (Diet in Influenza)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) एक ऐसी बीमारी है, जिससे बचने या राहत पाने के लिए खानपान बहुत महत्व रखता है। अपने आहार का ध्यान रख कर न केवल आप इस बीमारी में अच्छा महसूस करेंगे, बल्कि जल्दी ठीक होने में भी आपको मदद मिलेगी और आपकी इम्युनिटी (Immunity) भी मजबूत होगी। जानिए कैसा होना चाहिए इन्फ्लुएंजा में आपका आहार (Diet in Influenza):

तरल पदार्थ (Liquids)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) या कोई भी बीमारी होने पर सबसे जरूरी है कि आपके शरीर में पानी की कमी न हो। पर्याप्त पानी पी कर आपके शरीर से हानिकारक तत्व भी बाहर निकल जाते हैं। पानी के अलावा आप अन्य हेल्दी तरल पदार्थ जैसे हर्बल टी (Herbal Tea) या नारियल पानी (Coconut Water) आदि भी पी सकते हैं।

एंटी-इंफ्लेमेटरी डायट (Anti-Inflammatory Diet)

एंटी-इंफ्लेमेटरी डायट में फल-सब्जियां (Vegetables and Fruits), साबुत अनाज (Whole Grain), फ्रेश हर्ब्स (Fresh Herbs) आदि शामिल करना चाहिए। इससे भी आपको फ्लू (Flu) से लड़ने में मदद मिलेगी।

ओमेगा-3 फैट्स (Omega-3 fats)

अधिक ओमेगा-3 फैट्स युक्त आहार का सेवन करने से भी इम्युनिटी (Immunity) बढ़ती है। इसलिए आपको जैसे टूना (Tuna), सल्मोन (Salmon), ट्राउट (Trout fish) आदि का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अलसी, पम्पकिन, चिआ सीड, अखरोट आदि को भी अपने आहार में शामिल करें।

इन्फ्लुएंजा में इन चीजों का सेवन अवश्य करें:

  • फल और सब्जियां
  • लीन प्रोटीन (Lean Protin) जैसे मछली या पोल्ट्री आदि
  • मेवे और सीड
  • ओलिव आयल
  • साबुत अनाज

यह भी पढ़ें: जुकाम और फ्लू में अंतर पहचानने के लिए इन लक्षणों का रखें ध्यान

क्या न खाएं (What not to eat in Influenza)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) में जहां कुछ चीजों को खाने की सलाह दी जाती हैं, वहीं कुछ खाद्य पदार्थ इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में, इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। जानिए, कौन से हैं यह खाद्य पदार्थ:

  • फुल फैट दूध (Full Fat Milk) या दूध से बनी चीज़ें (Milk Product)
  • प्रोस्सेड फूड़ (Processed Food)
  • कैफीन युक्त चीजें जैसे चाय या कॉफी (Caffeine)
  • एल्कोहॉल (Alcohol)
  • तली हुई चीजें (Fried Food)
  • अधिक नमक या चीनी युक्त आहार (Sugar and Salt)
  • मसालेदार खाद्य पदार्थ (Spicy Foods)

मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के लिए क्लिक करें :

इन्फ्लुएंजा के ट्रीटमेंट के दौरान क्या ना करें? (Treatment of Influenza)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) में बीमार व्यक्ति बैचैन और थका हुआ महसूस करता है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू (Flu) की तरह ही लेकिन अधिक परेशान करने वाले हो सकते हैं। इसकी शुरुआत नाक के बहने, बुखार, खांसी या ठंड लगने से होती है। इसके उपचार के दौरान भी आपके लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। जानिए इन्फ्लुएंजा के ट्रीटमेंट (Treatment of Influenza) के दौरान क्या नहीं करना चाहिए:

खांसी की दवाई न लें (Don’t Take Cough Syrup)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) के दौरान आपको खांसी की समस्या हो सकती है जिससे थकावट और दर्द महसूस कर सकते हैं। लेकिन, इसमें खांसी के लिए मौजूद दवाईयां फायदेमंद साबित नहीं होती हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना इसे न लें।

वायरस

एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें (Don’t take antibiotics)

इन्फ्लुएंजा (Influenza) एक वायरस की वजह से होता है और वायरस को लेकर एक एंटीवायरल दवाई ही ठीक कर सकती है। एंटीबायोटिक्स का सेवन बैक्टीरियल इंफेक्शन में किया जाता है।

बच्चों को एस्पिरिन न दें (Don’t give Aspirin to Children)

अगर आपका बच्चा इन्फ्लुएंजा (Influenza) या फ्लू से पीड़ित है तो सिरदर्द होना सामान्य है। इससे राहत पाने के लिए आप कभी भी उसे एस्पिरिन न दें क्योंकि इससे बच्चे को गंभीर समस्याएं हो सकती हैं जैसे लिवर या दिमाग से संबंधित समस्याएं।

इन्फ्लुएंजा वैक्सीनेशन के बारे में पूरी जानकारी (Influenza Vaccination)

इस बारे में दिल्ली के क्लीनिक्ल जनरल फीजिश्यन डॉक्टर अशोक रामपाल का कहना है कि प्रिजर्वेटिव-फ्री फ्लू वैक्सीन एक प्रकार की फ्लू वैक्सीन है, जिसमें थिमेरोसल नामक एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल एजेंट नहीं होता है। इसमें मौजूद मरकरी बेस्ड यौगिक बैक्टीरिया, कवक, या अन्य सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने के लिए, इसे टीके के रूप में शामिल किया गया है। कुछ लोग प्रिजर्वेटिव-फ्री टीकों के डरते हैं, क्योंकि सुनने में आ चुका है कि वैक्सीन में मौजूद प्रिजर्वेटिव ऑटिज्म का कारण बन सकती है। लेकिन कई अध्ययनों में पाया गया है कि वैक्सीन और इसका कोई संबंध नहीं है। आइए जानते हैं इसमें मौजूद थिमेरोसल के बारे में।

इन्फ्लुएंजा (Influenza) से बचने के लिए 6 महीने या उससे बड़े लोगों को इन्फ्लुएंजा वैक्सीन (Influenza Vaccine) लेने की सलाह दी जाती है। पूरी सुरक्षा के लिए आपको यह वैक्सीन हर साल लेनी चाहिए। यह वैक्सीन फ्लू (Flu) या इन्फ्लुएंजा (Influenza) के लक्षणों को कम करने में प्रभावी होती है। यह वैक्सीन गर्भवती महिलाओं के लिए भी पूरी तरह से सुरक्षित है। इस वैक्सीन को आप शॉट या नेजल स्प्रे के रूप में ले सकते हैं।

निम्नलिखित स्थितियों में आपको फ्लू शॉट्स (Flu Shots) लेने की सलाह नहीं दी जाती:

  • फेफड़ों, किडनी या लिवर से जुड़ी समस्या
  • डायबिटीज
  • हार्ट प्रॉब्लम
  • न्यूरोलॉजिकल डिजीज
  • मोटापा
  • ब्लड डिसऑर्डर्स
  • अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है और आप इससे संबंधित कोई दवाई ले रहे हैं, तो आपको यह वैक्सीनेशन कराने की सलाह नहीं दी जाती।
  • अगर आपको बुखार है, तो बुखार ठीक होने तक

इन्फ्लुएंजा

इस वैक्सीन को नेजल स्प्रे के रूप में भी दिया जाता है। लेकिन, कुछ लोगों को नेजल फ्लू वैक्सीन लेने की सलाह नहीं दी जाती, जैसे:

  • बच्चे और किशोर जो एस्पिरिन या किसी भी प्रकार के सैलिसिलेट युक्त मेडिकेशन थेरेपी का प्रयोग कर रहे हैं।
  • दो से लेकर चार साल की उम्र के बच्चे जिन्हें अस्थमा या अस्थमा के लक्षण हैं।
  • जिन बच्चों या युवाओं का इम्यून सिस्टम कमजोर है

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इस वैक्सीन को लेने की सही उम्र क्या है? (Right Age of Vaccine)

फ्लू का टीका लगवाने का सबसे अच्छा समय छोटी उम्र है। यानी, आप अपने छोटे बच्चों को जितनी जल्दी हो सके यह टीका लगवाएं। वैक्सीन को अपने सुरक्षात्मक लाभों को प्राप्त करने में लगभग 3 सप्ताह लगते हैं, इसलिए इसे प्राप्त करने में देरी न करें।

इन्फ्लुएंजा बुजुर्गों और अधिक बीमार लोगों के लिए खतरनाक क्यों है?

बुजुर्ग और अधिक बीमार लोगों को (Influenza) से लड़ने में मुश्किल होती है क्योंकि उनका शरीर इन इंफेक्शन से लड़ने के लिए तैयार नहीं होता। उम्र और बीमारी के कारण वो शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं। बुजुर्गों में इन्फ्लुएंजा के कारण निमोनिया (Pneumonia) का शिकार हो सकते हैं या उनकी मृत्यु भी हो सकती है।

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इन्फ्लुएंजा (Influenza) से बचना और इससे राहत पाना आसान है। सही आहार लें, आराम करें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। इसके साथ ही अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें। इन सब उपायों का पालन करने के आप आसानी से इस समस्या से लड़कर स्वस्थ हो सकते हैं। किन्हीं स्थितियों में यह रोग जोखिम भरा भी हो सकता है। इसलिए, अगर इस दौरान आपको कोई भी असामान्य लक्षण नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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