मुंह की समस्याओं का कारण कहीं डायबिटीज तो नहीं?

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अपडेट डेट फ़रवरी 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। डायबिटीज ओरल हेल्थ यानि मुंह की समस्या का भी कारण बन सकती है। डायबिटीज से मुंह की समस्या आम परेशानी है। सामान्य लोगों के मुकाबले डायबिटीज वाले लोगों को मुंह की समस्याएं होने का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या के बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताएंगे।

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डायबिटीक लोगों की ओरल हेल्थ

डायबिटीज और ओरल हेल्थ समस्याओं के बीच लिंक हाई ब्लड शुगर है। अगर ब्लड शुगर को ठीक तरीके से नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो मुंह की समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अनियंत्रित डायबिटीज वाइट ब्लड सेल को कमजोर करता है, जो मुंह में होने वाले बैकटिरियल इंफेक्शन के खिलाफ लड़ता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या के तार इसलिए जुड़े हुए हैं क्योंकि हाई ब्लड शुगर आगे चलकर मुंह के अंदर के होने वाले फंक्शन को कमजोर कर देता है।

जैसा कि अध्ययनों से पता चला है कि ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने से मधुमेह से दूसरों अंगों पर होने वाले खतरों को कम किया जा सकता है – जैसे आंख, हृदय और नर्व डैमेज।  इसके अलावा मधुमेह को कंट्रोल करने से मुंह की समस्याओं से भी बचा जा सकता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या के अलावा दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं। लेकिन डायबिटीज को कंट्रोल करके आप दूसरी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

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डायबिटीज से मुंह की समस्याः

मधुमेह से ग्रसित लोगों को इन बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है :

ड्राई माउथ:

अनियंत्रित शुगर, लार (थूक) के प्रवाह को कम कर सकता है, जिसकी वजह से ड्राई माउथ हो सकता है। ड्राई माउथ आगे चलकर खराश, अल्सर, इंफेक्शन और दांत की समस्याओं का कारण बन सकता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या में ड्राई माउथ बहुत कॉमन हैं और सबसे बड़ी बात लोग इस परेशानी पर ध्यान नहीं देते। इसकी प्रॉब्लम बढ़ने पर लोग अपने डेंटिस्ट से सुझाव लेते हैं। लेकिन ड्राई माउथ को इग्नोर करने की वजह से लोगों को दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ड्राई माउथ की वजह से व्यक्ति को खराश की परेशानी होती है। इसके अलावा अल्सर भी ड्राई माउथ की वजह से होता है।

मसूड़े की सूजन (Gingivitis) और पीरियोडोंटाइटिस (Periodontitis):

व्हाईट ब्लड सेल को कमजोर करने के अलावा मधुमेह की एक और परेशानी यह है कि यह ब्लड वैसेल को मोटा करती है। मसूड़ों में सूजन की वजह से पोषक तत्व शरीर में नहीं जाते और ना ही दांतों की सफाई हो पाती है। जब मुंह के अंदर इस तरह की परेशानी होती है, तो शरीर इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता खो देता है। चूंकि पीरियोडोंटाइटिस एक बैक्टिरियल इंफेक्शन है, इसलिए अनियंत्रित मधुमेह वाले लोग बार-बार गंभीर मसूड़ों की बीमारी का अनुभव कर सकते हैं। डायबिटीज से मुंह की समस्या होने पर समय से अपने डॉक्टर से सलाह लें। समय से डॉक्टर को दिखाने से मुंह की समस्या को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या में मसूड़े की सूजन सबसे सामान्य परेशानी है जिसे लोग घरेलू उपाय से ठीक कर देते हैं।

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डायबिटीज से मुंह की समस्या का बने रहना

मुंह की सर्जरी या दूसरे दांत के इलाज के बाद अनियंत्रित मधुमेह वाले लोग जल्दी से ठीक नहीं होते हैं क्योंकि हो सकता है कि इलाज वाली जगह पर ब्लड फ्लो ठीक ना हो। मसूड़ें की सूजन की वजह खून का फ्लो ठीक नहीं रहता जिससे दूसरी परेशानी हो सकती है।

थ्रश

शुगर के मरीज अलग-अलग इंफेक्शन से लड़ने के लिए अक्सर एंटीबायोटिक लेते हैं, जिन्हें खासतैर पर मुंह और जीभ का फंगल इंफेक्शन होने का खतरा होता है। अनियंत्रित डायबिटीज वाले लोगों की लार में फंगस हाई ग्लूकोज लेवल की वजह से पनपता है। डेन्चर पहनने (विशेषकर जब उन्हें लगातार पहना जाता है) से भी फंगल इंफेक्शन हो सकता है।

मुंह या जीभ में जलन

यह परेशानी थ्रश की वजह से होती है। मुंह या जीभ में जलन डायबिटीज से मुंह की समस्या का एक कारण हो सकता है। मुंह या जीभ में जलन में डायबिटीज बड़ा रोल निभाता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या में जीभ में जलन हर किसी को महसूस नहीं होती लेकिन इसके लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें। इसके डायबिटीज से मुंह की समस्या में होंठ या जीभ के छाले भी काफी लोगों को परेशान करते हैं। इस परेशानी के लिए कई बार आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती और यह खुद ही ठीक हो जाता है। मुंह या जीभ में जलन होने पर आप अपने डेंटिस्ट से बात कर सकते हैं।

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डायबिटीज से मुंह की समस्या होने पर सफाई रखने के टिप्स

  • अपने दांतों और मसूड़ों की अपने डॉक्टर द्वारा साल में कम से कम दो बार साफ और जांच करवाएं। कितनी बार आपको चेकअप की जरुरत  होगी, यह निर्धारित करने के लिए अपने दांत के डॉक्टर से बात करें।
  • दिन में कम से कम एक बार डेंटल फ्लॉस से दांतों में प्लेक होने से रोकें।
  • खाने के बाद ब्रश करें। नरम-ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करें।
  • अगर आप डेंचर पहनते हैं, तो उन्हें हटा कर हर रोज साफ करें।
  • अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो छोड़ने के तरीकों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

मधुमेह के साथ, जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धुम्रपान करने वालों को थ्रश और पेरियोडॉन्टल बीमारी होने की 20 गुना अधिक चांसेज होते हैं। धूम्रपान करने से मसूड़ों में ब्लड का फ्लो रुकता है, जो इस टिसु के आस-पास घाव भरने को प्रभावित कर सकता है। डायबिटीज से मुंह की समस्या को कम करने के लिए समय-समय पर जांच कराना जरूरी है। 

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