क्या आपको भी है एक या दो दिन पीरियड्स आने की परेशानी?

    क्या आपको भी है एक या दो दिन पीरियड्स आने की परेशानी?

    महीने के पीरियड्स के चार से पांच दिन महिलाओं के लिए सबसे मुश्किल दिन होते हैं। पेट में दर्द, क्रैम्प्स, ब्लीडिंग, मूड स्विंग इन सब से परेशानी होना स्वाभाविक है। लेकिन, यह पीरियड्स न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। बल्कि, यह मेंस्ट्रुल सायकल हमारी हेल्थ के बारे में भी बहुत कुछ बताता है। क्या आपको याद है कि आपका लास्ट मेंस्ट्रुअल पीरियड कब शुरू हुआ था और कितने दिन तक रहा था? क्या आपने एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो इस पर भी थोड़ा ध्यान देना शुरू करें। क्योंकि, इससे आपको बहुत कुछ समझने में मदद मिलेगी, जैसे टाइम ओव्यूलेशन (Time Ovulation) , मिस्ड पीरियड्स (Missed Period) और अनप्रेडिक्टेबल मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग (Unpredictable Menstrual Bleeding) आदि।

    पीरियड्स की लेंथ में भी कई बदलाव आ सकते हैं और इनके पीछे कई कारण भी हो सकते हैं। अगर आपके पीरियड भी अचानक से कम समय के हो रहे हैं तो कई बार इसके पीछे कोई सामान्य कारण हो सकता है। लेकिन, कई बार यह चिंता का विषय भी बन सकता है। हम बात करेंगे एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) के बारे में, जिसे आप पीरियड कम आना भी कह सकते हैं। जानिए, इसके बारे में विस्तार से।

    सामान्य या रेगुलर पीरियड्स किसे कहा जाता है? (Normal or Regular Periods)

    अधिकतर महिलाओं को जीवन में पीरियड कम आने की शिकायत होती ही है। जब बात माहवारी की आती है तो इसमें सामान्य की कोई परिभाषा नहीं है। आप कई बार एक महीने में दो बार पीरियड्स का अनुभव भी कर सकती हैं। हर किसी के लिए पीरियड्स में सामान्य की परिभाषा अलग हो सकती है। सामान्य मेंस्ट्रुअल सायकल 28 दिनों का होता है। लेकिन अगर किसी का 21 से लेकर 45 दिनों के बीच में पीरियड्स आते हैं। तो उसे भी सामान्य ही माना जा सकता है। ऐसे ही आमतौर पर महिलाओं को चार से 6 या 7 दिन तक ब्लीडिंग होती है। किंतु, अगर आपको यह केवल एक या दो दिन तक ही हो, तो इसे असामान्य कहा जा सकता है।

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    U.S. डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ और ह्यूमन सर्विसेज (U.S. Department of Health & Human Services) के अनुसार महिलाओं में मेंस्ट्रुअल सायकल पीरियड के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है। इस मंथली मेंस्ट्रुअल सायकल के दौरान महिलाओं का शरीर कई तरह के केमिकल्स बनाता है। जिन्हें हॉर्मोन्स कहा जाता है। यह हॉर्मोन्स गर्भावस्था के लिए महिलाओं के शरीर को तैयार करते हैं। यह बदलते हॉर्मोन लेवल्स मेंस्ट्रुअल सिम्पटम्स का भी कारण बनते हैं और मेंस्ट्रुअल सायकल उम्र के साथ बदलता जाता है।

    ऐसा माना जाता है कि 5 से लेकर 35 प्रतिशत महिलाएं असामान्य पीरियड की समस्या का सामना करती हैं। अगर आप एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) का अनुभव कर रही हैं तो इसके कई कारण हो सकते हैं। जानते हैं इन कारणों के बारे में।

    एक या दो दिन की महावारी

    एक या दो दिन की माहवारी के क्या कारण है? (Causes of Periods for One or Two Days)

    अगर किसी को एक या दो दिन ही ब्लीडिंग होती है तो इसका क्या कारण है? क्या यह किसी समस्या का संकेत है? यह सवाल मन में आना सामान्य है। आइए जानते हैं पीरियड कम आना किस वजह से होता है:

    प्रेग्नेंसी ( pregnancy)

    प्रेग्नेंसी में भी महिलाओं को ब्लीडिंग होती है, खासतौर पर पहली तिमाही में। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टट्रिशन और गायनेकोलॉजिस्ट (American College of Obstetricians and Gynecologists) के अनुसार पंद्रह से पच्चीस प्रतिशत महिलाओं को पहली तिमाही में ब्लीडिंग होती है। यही नहीं, फर्टिलाइजेशन के एक या दो हफ्तों बाद भी स्पॉटिंग हो जाती है। अगर आपको एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) जैसी ब्लीडिंग हो रही है। तो इन स्थितियों में यह प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं:

    • अगर यह ब्लीडिंग ओव्यूलेशन और जब आपके पीरियड आने वाले हों, इस समय के बीच में होती है तो यह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding) का सिग्नल हो सकता है।
    • अगर यह ब्लीडिंग तब होती है, जब आपके पीरियड्स का समय नजदीक हो। यह अर्ली प्रेगनेंसी स्पॉटिंग या इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग में देरी के कारण हो सकता है।
    • यह ब्लीडिंग देरी से आने या मिस्ड पीरियड के बाद भी हो सकती है।

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    हालांकि प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग बेहद सामान्य है। लेकिन, यह प्रेग्नेंसी लॉस का संकेत भी हो सकती है। अगर आपको लगता है कि आप शायद गर्भवती हैं या प्रेग्नेंसी लॉस को अनुभव कर रही हैं, तो आपको जल्दी से जल्दी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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    पेरिमेनोपॉज (Perimenopause)

    जब कोई महिला तीस से पचास साल की उम्र तक पहुंच जाती है तो वो पेरिमेनोपॉज का अनुभव करना शुरू कर देती है। मेनोपॉज से पहले इन सालों में भी वो अपने पीरियड्स में बदलाव नोटिस कर सकती है। यह बदलाव एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) जैसे हो सकता है। इसके अलावा उन्हें शार्ट पीरियड या स्किप पीरियड की समस्या भी हो सकती है। पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) के लक्षण इस प्रकार हैं:

    एनोवुलेटरी सायकल (Anovulatory Cycle)

    एनोवुलेटरी सायकल वो समय होता है जब ओवरीज एग रिलीज नहीं करती हैं। यह तब होता है जब महिलाएं मेनोपॉज के नजदीक होती हैं। जब कोई महिला ओव्युलेट नहीं करती है तो पीरियड असामान्य हो सकते हैं और एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) भी हो सकती है। इस समस्या के अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:

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    एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

    एंडोमेट्रियोसिस की परेशानी तब होती है जब एक टिश्यू जो गर्भाशय में ग्रो होने वाले टिश्यू के जैसा होता है, गर्भाशय के बाहर ग्रो होने लगता है। यह टिश्यू आमतौर पर ओवरीज (ovaries), फॉलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes) में ग्रो होता है। एंडोमेट्रियोसिस के कारण भी पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होती है। इसलिए कई महिलाएं इसे एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) समझ लेती हैं। इसके अन्य लक्षण इस प्रक्रार हैं:

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    गर्भपात (Miscarriage)

    गर्भपात के कारण होने वाली ब्लीडिंग को भी एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) समझा जा सकता है। खासतौर पर अगर आपको पता ही न हो कि आप गर्भवती हैं। यह ब्लीडिंग लाइट स्पॉटिंग से लेकर हैवी फ्लो तक हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी प्रेग्नेंसी कितने महीने की है। ऐसे में, आप पेट या पीठ में भी क्रैम्प्स अनुभव कर सकती हैं। अगर आपको गर्भपात का संदेह है, तो भी आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding)

    ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी आप लाइट पीरियड का अनुभव कर सकती है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं को पीरियड नहीं आते हैं। ऐसा हॉर्मोन्स के कारण होता है। आमतौर पर शिशु के जन्म के 9 से 18 महीनों महिला को पीरियड्स नहीं आते हैं अगर वो शिशु को स्तनपान कराती है। लेकिन, कई बार इस दौरान होने वाली हल्के ब्लीडिंग को भी एक या दो दिन की महावारी (Periods for One or Two Days) समझा जा सकता है।

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    पिल और अन्य दवाईयां (The Pill and other Medications)

    हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स और शॉट्स (Hormonal Birth Control Pills and Shots) भी हल्के या कम पीरियड्स का कारण बन सकती हैं। क्योंकि, इनमें हॉर्मोन्स होते हैं जो यूटरस की लायनिंग को पतला कर सकते हैं। इसके कारण काम ब्लीडिंग वाले पीरियड्स आते हैं। यही नहीं, इंट्रायूटेराइन डिवाइस (Intrauterine Device) के कारण भी ऐसा हो सकता है। अन्य ओवर-द-काउंटर (Over-the-Counter Medicine) और सप्लीमेंट्स या डॉक्टर की सलाह के बाद दी जाने वाली दवाईयां भी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग में परिवर्तन का कारण बन सकती हैं। इनमें यह सब दवाईयां भी शामिल हैं:

    • एस्पिरिन और प्रिस्क्रिप्शन ब्लड थिनर (Aspirin and Prescription Blood Thinners)
    • नोस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स और नेप्रोक्सेन (Nonsteroidal Anti-Inflammatory Drugs and Naproxen)
    • हार्मोनल थेरेपी ड्रग्स (Hormonal Therapy Drugs)
    • कैंसर के उपचार के लिए दवाईयां (Medicines to Treat Cancer)
    • थायरॉइड की दवाईयां (Thyroid Medications)
    • कुछ एंटी डिप्रेसेंट्स (Some Antidepressants)
    • हर्बल सप्लीमेंट्स जो ब्लीडिंग को प्रभावित करते हैं जैसे हल्दी, लहसुन आदि (Herbal Supplements)।

    अगर आप इन दवाईयों को लेते हैं, तो आप अपने मेंस्ट्रुअल फ्लो में बदलाव महसूस कर सकते हैं।

    Periods for one or two days

    पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome)

    पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या में महिला का शरीर सामान्य से अधिक हॉर्मोन्स बनाता है। इस प्रकार का हार्मोनल असंतुलन ओव्यूलेशन को होने से रोक सकता है। इसके कारण आप लाइटर या शार्ट समय के लिए पीरियड्स का अनुभव कर सकते हैं। यह ब्लीडिंग एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) की तरह हो सकती है। इस समस्या के अन्य लक्षण इस प्रकार हैं

    • चेहरे पर अधिक बाल (Excessive Facial Hair)
    • थकावट (Fatigue)
    • आवाज का गहरा होना (Deeper Voice)
    • मदद स्विंग्स (Mood Swings)
    • बांझपन (Infertility)

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    थायरॉइड डिजीज (Thyroid Disease)

    थायराइड हार्मोन मासिक धर्म के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए जब थायराइड रोग के कारण महिलाओं के शरीर में उन हार्मोनों का बहुत अधिक या अपर्याप्त उत्पादन हो जाता है, तो यह आपके मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है। थायराइड की समस्या होने पर आपके पीरियड्स अनियमित या कम हो सकते हैं। इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन, कुछ इस प्रकार हैं

    लाइफस्टाइल (Lifestyle)

    अगर आपने अपनी डेली रुटीन में कोई बदलाव किया है, अपनी डायट में कोई चेंज किए हैं तो इन सब का प्रभाव भी आपके पीरियड्स पर पड़ सकता है। जिन लाइफस्टाइल फैक्टर्स का असर पीरियड्स पर पड़ता है और जिनके कारण पीरियड्स कम आना जैसी समस्या हो सकती है, वो इस प्रकार हैं :

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    तनाव (Stress)

    अगर आपके जीवन में ऐसा कुछ चल रहा है जिसके कारण आप तनाव में हैं तो इसके कारण भी पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। यह स्ट्रेस काम, परिवार या निजी कारणों से हो सकती है। अगर यह तनाव बहुत अधिक हो जाए तो यह एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) का कारण बन सकता है। इसके कारण आपके पीरियड्स भी स्किप हो सकते हैं। आप ऐसा भी मान सकते हैं कि पीरियड तनाव के स्तर को जांचने के लिए एक बैरोमीटर की तरह है। जब तनाव कम हो जाता है तो पीरियड्स भी सामान्य हो जाते हैं।

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    बहुत अधिक व्यायाम करना (Too Much Exercise)

    बहुत अधिक व्यायाम करने से भी महिलाओं को असामान्य या मिस्ड पीरियड की समस्या हो सकती है। अगर आप एथलीट हैं या किसी प्रतियोगिता के लिए ट्रेनिंग कर रही हैं या हाल ही में आपने अपने आहार में परिवर्तन किए बिना अपने एक्सरसाइज लेवल में बदलाव किया है तो इसका अर्थ यह है कि आपके शरीर में हेल्दी मेंस्ट्रुएशन के लिए एनर्जी नहीं है। यह भी एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) का कारण बन सकता है।

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    एक या दो दिन की महावारी

    कब लें डॉक्टर की सलाह?

    अगर आप अपने एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) को लेकर चिंतित हैं तो डॉक्टर की सलाह लें। डॉक्टर इस समस्या का निदान कर के आपका सही उपचार कर सकते। जानिए किन स्थितियों में आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए:

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    यह तो थी एक या दो दिन की माहवारी (Periods for One or Two Days) या पीरियड कम आना जैसी समस्या के बारे में पूरी जानकारी। हालांकि, यह समस्या सामान्य है। लेकिन कई बार इसका कारण कुछ गंभीर भी हो सकता है। इसलिए अगर आप इस परेशानी का सामना कर रही हैं , तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। खासतौर पर अगर आपको लगता है कि आप गर्भवती हैं। इसके साथ ही सही और सुचारु पीरियड्स के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कुछ अच्छे बदलाव भी करने चाहिए। जैसे रोजाना व्यायाम करें, तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें और सही व संतुलित आहार का सेवन करें। इससे न केवल आपकी यह समस्या कम होगी बल्कि आपको हेल्दी रहने में भी मदद मिलेगी।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 19/05/2021 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड